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महंगाई से बचने का नया तरीका: दाम बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन घटा रहीं कंपनियां, विज्ञापनों पर होने वाले खर्च में की कटौती

Mon, 16 May 2022 06:52 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली। 

सार

हल्दीराम ने आलू भुजिया के पैक का वजन 13 ग्राम घटाकर 42 ग्राम कर दिया है। पहले यह 55 ग्राम का होता था। पारले जी ने 5 रुपये वाले बिस्कुट का वजन 64 ग्राम से घटाकर 55 ग्राम कर दिया है तो विम बार के वजन में 20 ग्राम की कमी की गई है। यह अब 155 की जगह 135 ग्राम हो गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कमोडिटीज की कीमतें बढ़ने के कारण एफएमसीजी कंपनियां इससे निपटने का नया तरीका अपना रही हैं। वे उत्पादों को महंगा करने के बजाय वजन कम कर रही हैं। इससे ग्राहकों को पुराने भाव पर कम वजन में चीजें मिल रही हैं।

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इसके अलावा, एफएमसीजी कंपनियां कुछ उत्पादों के सस्ते पैक भी ला रही हैं और विज्ञापनों पर होने वाले खर्च भी घटा रही हैं। रूस-यूक्रेन के कारण तमाम कमोडिटी काफी लंबे समय से महंगी हैं। इसके साथ ही इंडोनेशिया से पाम तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध ने कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी हैं। कंपनियों की कमाई पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।  

रोजाना उपयोग होने वाले उत्पादों पर पड़ रहा है असर
जिन उत्पादों पर महंगाई की ज्यादा मार पड़ रही है, उसमें बिस्कुट, चिप्स, आलू भूजिया, छोटे-छोटे साबुन, चाकलेट और नूडल्स जैसे उत्पाद हैं। इन उत्पादों का रोजाना घरों में इस्तेमाल होता है। पारले प्रोडक्ट के कैटेगरी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि कम वजन वाले पैक की बिक्री ज्यादा हो रही है।  
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आलू भुजिया में 13 ग्राम की कटौती
हल्दीराम ने आलू भुजिया के पैक का वजन 13 ग्राम घटाकर 42 ग्राम कर दिया है। पहले यह 55 ग्राम का होता था। पारले जी ने 5 रुपये वाले बिस्कुट का वजन 64 ग्राम से घटाकर 55 ग्राम कर दिया है तो विम बार के वजन में 20 ग्राम की कमी की गई है। यह अब 155 की जगह 135 ग्राम हो गया है।

बीकाजी ने पैकेट का वजन आधा किया
बीकाजी ने 10 रुपये वाले नमकीन का पैकेट आधा कर दिया है। पहले यह 80 ग्राम का होता था जो अब 40 ग्राम का हो गया है। ज्यादातर कंपनियों ने हैंडवॉश का वजन भी 200 एमएल से घटाकर 175 एमएल कर दिया है।

25 से 33% का योगदान
ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों के कारोबार में एक से 10 रुपये वाले छोटे पैक का योगदान 25-35 फीसदी होता है। बड़े पैक पर वे कीमतें तो बढ़ा देती हैं, पर छोटे पैक पर कीमतें बढ़ाना घाटे का सौदा होगा।

शहरों में कीमत बढ़ी गांवों में वजन घटा
डाबर इंडिया ने कहा, शहरी क्षेत्रों में ग्राहक ज्यादा कीमत दे सकता है, वहां उत्पाद महंगे किए गए हैं। गांवों में पैकेट का वजन घटाया गया है क्योंकि यहां एक रुपये, 5 रुपये और 10 रुपये वाले पैक ज्यादा बिकते हैं। महंगाई में निकट समय में राहत नहीं दिखने से अब कंपनियां ब्रिज पैक भी पेश कर रही हैं, जिसका मतलब दो कीमत वाले उत्पाद को एक में मिलाकर पेश करने से है।

एचयूएल ने अपनाया खास तरीका
हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने कहा कि महंगाई से निपटने के लिए वह ब्रिज पैक की रणनीति अपना रही है। इमामी के कुल कारोबार में छोटे पैक का योगदान 24% है। ब्रिटानिया ने कहा कि उसके कारोबार में 5 और 10 रुपये वाले उत्पाद 50-55 फीसदी का योगदान करते हैं।

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