मजबूत वैश्विक मांग और अगले सप्ताह अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीद बढ़ने से शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गईं। सोने की कीमत 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 1,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने इसकी पुष्टि की है।
चालू कैलेंडर वर्ष में पीली धातु की कीमतों में 34,850 रुपये प्रति 10 ग्राम या 44.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह 31 दिसंबर, 2024 को 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 44,850 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने कहा कि कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी हाल के अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों से प्रेरित है। इसने 2025 के अंत से पहले फेडरल रिजर्व द्वारा कई ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को बढ़ा दिया है, जिससे बुलियन में खरीदारी गतिविधि को बढ़ावा मिला है। गांधी ने कहा कि इसके अलावा, औद्योगिक धातुओं में सकारात्मक रुख और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों से मजबूत प्रवाह से चांदी की तेजी को लाभ मिला।
एसोसिएशन के अनुसार, भौतिक और निवेश खंडों में मांग मजबूत रहने के कारण सफेद धातु 1,28,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। इस वर्ष चांदी की कीमतों में तेजी रही है। यह 31 दिसंबर, 2024 को 89,700 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 42,300 रुपये या 47.16 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना हाजिर 12.69 डॉलर या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 3,646.69 डॉलर प्रति औंस हो गया। वैश्विक बाजारों हाजिर चांदी 1.82 प्रतिशत बढ़कर 42.31 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च एनालिस्ट कमोडिटी एंड करेंसी, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि अगले सप्ताह फेड द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के कारण कॉमेक्स पर सोना 3,647 डॉलर पर मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था। उन्होंने कहा कि ओवरबॉट क्षेत्र में होने के बावजूद, टैरिफ अनिश्चितता और डी-डॉलराइजेशन थीम के कारण सोने पर प्रीमियम बना हुआ है।
अबांस फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ चिंतन मेहता ने कहा कि निवेशक फेडरल रिजर्व के रुख, आगामी श्रम बाजार के आंकड़ों और अमेरिका की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर कड़ी नजर रखेंगे, जो सभी ब्याज दरों के दृष्टिकोण को आकार दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थिर मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में कटौती की बदलती उम्मीदों और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सोना लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और व्यापारी एक और उतार-चढ़ाव भरे उच्च स्तर की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।