वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, कमजोर डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में बुधवार को सोने की कीमत 250 रुपये बढ़कर 1,13,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 250 रुपए बढ़कर 1,12,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं चांदी की कीमतें बुधवार को रिकॉर्ड स्तर से नीचे गिरकर 300 रुपये की गिरावट के साथ 1,28,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने इसकी पुष्टि की है।
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सोने की कीमतों में अब तक हुई 43.12% की वृद्धि
इस साल अब तक कीमती धातु की कीमतों में 34,050 रुपये या 43.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 31 दिसंबर, 2024 को 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़ रही है। मंगलवार को यह कीमती धातु 5,080 रुपये की तेजी के साथ 1,12,750 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
कमजोर डॉलर ने सोने को सहारा दिया
अबान्स फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ चिंतन मेहता ने कहा कि सोना लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा है। इसे कमजोर अमेरिकी डॉलर सूचकांक का समर्थन प्राप्त है, जो सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही आने वाले महीनों में ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की बढ़ती उम्मीदें भी इसका कारण हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से अतिरिक्त मजबूती आई है। हालांकि ऐसा लगता है कि इसका अधिकांश हिस्सा पहले ही मूल्यांकित हो चुका है।
वैश्विक बाजार में बढ़ें सोने-चांदी के दाम
विदेशी बाजारों में सोना हाजिर 0.85 प्रतिशत बढ़कर 3,657.09 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। मंगलवार को यह पीली धातु 3,674.75 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गई थी। वहीं हाजिर चांदी 0.88 प्रतिशत बढ़कर 41.23 डॉलर प्रति औंस हो गई।
इन कारणों से बढ़ी सुरक्षित निवेश की मांग
वेंचुरा के कमोडिटी डेस्क और सीआरएम प्रमुख एनएस रामास्वामी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत संभावना, वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों का संचय, भू-राजनीतिक तनाव, ईटीएफ और संस्थागत प्रवाह कीमती धातु की तेजी के पीछे प्रमुख चालक बने हुए हैं।
रामास्वामी ने आगे कहा कि सोना अब मुख्य भोजन बनता जा रहा है, जिसे गर्म करके परोसा जाता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस, जापान में ताजा राजनीतिक संकट और रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह नई ऊंचाईयां सामने आई हैं। इसके अलावा, शुक्रवार को अमेरिका में रोजगार की उम्मीद से कमजोर रिपोर्ट आने के बाद ब्याज दरों में कटौती की अटकलें तेज हो गई हैं।
रामास्वामी ने कहा कि बाजार सहभागी अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों पर कड़ी नजर रखेंगे, जिनमें बाद में जारी होने वाला उत्पादक मूल्य सूचकांक और गुरुवार को जारी होने वाला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक शामिल है। इसका फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती के निर्णय और निकट भविष्य में सर्राफा कीमतों की धारणा पर असर पड़ सकता है।