कमजोर डॉलर और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से बढ़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग बढ़ने से दिल्ली में सोमवार को सोने की कीमत एक लाख रुपये की दहलीज पर पहुंच गई। सोने का भाव 1,650 रुपये की तेजी के साथ एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब आ गया है।
इस वर्ष अब तक पीली धातु की कीमतें पिछले वर्ष 31 दिसंबर से 20,850 रुपये या 26.41 प्रतिशत प्रति 10 ग्राम बढ़ चुकी हैं। चांदी की कीमत भी 500 रुपये बढ़कर 98,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। शुक्रवार को चांदी की कीमत 98,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।
कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति ने कहा, "इस साल, व्यापार तनाव, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कमजोर डॉलर के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखा गया है। अब तक सोने में 25 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें अमेरिकी प्रशासन द्वारा 2 अप्रैल को टैरिफ की घोषणा के बाद से 6 फीसदी की बढ़ोतरी भी शामिल है।"
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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जून डिलीवरी वाले सोना वायदा का भाव 1,621 रुपये यानी 1.7 प्रतिशत बढ़कर 96,875 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना हाजिर 3,397.18 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार आया और यह 3,393.49 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक स्तर पर सोने का वायदा भाव पहली बार 3,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया और इसमें 80 डॉलर प्रति औंस या 2.4 प्रतिशत की तेजी आई।
जानकारों के अनुसार "सोने की कीमतों में सकारात्मक तेजी जारी रही और यह 3,400 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई। व्यापार शुल्क संबंधी अनिश्चितता, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और ट्रेजरी प्रतिफल में वृद्धि से सोने को उछाल मिल रहा है।"
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चैनवाला ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल को हटाने की धमकी के बाद सुरक्षित निवेश के लिए सोने की मांग बढ़ी है। एशियाई बाजार में हाजिर चांदी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 32.85 डॉलर प्रति औंस हो गई।
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अबांस फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चिंतन मेहता के अनुसार, बाजार प्रतिभागी राष्ट्रपति ट्रम्प की विकसित हो रही टैरिफ रणनीति और इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे, साथ ही ब्याज दर की दिशा के बारे में संकेत के लिए फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) के सदस्यों की टिप्पणियों पर भी नजर रखेंगे।मेहता ने कहा कि आगे भी नरमी या लंबे समय तक अनिश्चितता के कोई भी संकेत सोने की अपील को मजबूत कर सकते हैं और सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ा सकते हैं।