सोने का भाव गुरुवार को फिर 91000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गया। अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार दिल्ली में सोना 365 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़त के साथ 91,050 रुपये के भाव पर पहुंच गया। बुधवार को 99.9 प्रतिशत की शुद्धता वाला सोना 90,685 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।
99.5 प्रतिशत की शुद्धता वाले सोने का भाव 365 रुपये चढ़कर 90, 600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस बीच, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी सोने का वायदा भाव 828 रुपये या 0.94 प्रतिशत बढ़कर 88,466 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया।
चांदी की कीमत भी 200 रुपए बढ़कर 1,01,700 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। बुधवार को चांदी की कीमत 1,01,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
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एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बुधवार को घोषित नए ऑटो टैरिफ के बाद वैश्विक जोखिम धारणा बढ़ने के कारण सोने में बढ़त जारी है।"
20 मार्च को पीली धातु की कीमतें बढ़कर 89,796 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना हाजिर 34.77 डॉलर या 1.15 प्रतिशत बढ़कर 3,054.05 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया।
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी व करेंसी के जतिन त्रिवेदी ने कहा, "अमेरिका में जीडीपी के कम आंकड़ों और 2 अप्रैल को अमेरिका की ओर से प्रत्याशित पारस्परिक टैरिफ की आशंकाओं के कारण सोने की कीमतें बढ़कर 3,050 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं।"
त्रिवेदी ने कहा कि कनाडा को संभावित रूप से समर्थन के कारण यूरोजोन के प्रति अमेरिका की नई धमकियों ने बाजार के जोखिम को बढ़ा दिया है। जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में और वृद्धि हुई है। एशियाई बाजार में अप्रैल डिलीवरी के लिए कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर मजबूत होकर 3,094.85 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गया।
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अबांस फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चिंतन मेहता के अनुसार, ट्रम्प की नीतियों से वैश्विक बाजार में आशंकाएं बनी हुई हैं। केंद्रीय बैंक आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए अब भी सोना जमा कर रहे हैं। इससे कीमती धातु की मजबूत मांग बनी हुई है। मेहता ने आगे कहा, "क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ, सोना पसंदीदा सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में कायम है।"
निवेशक शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति के लिए ये आंकड़े प्रमुख संकेतक का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कारोबारी फेडरल रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों के बयानों पर नजर बनाए हुए हैं।