नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ने भारतीय पूंजी बाजारों में 1,33,074 करोड़ रुपये का निवेश किया। मौद्रिक नीति नें नरमी और अर्थव्यवस्था को सहारा देने के सरकारी उपायों के चलते एफपीआई ने निवेश किया है।
1,33,074 करोड़ रुपये के निवेश में से 97,250 करोड़ रुपये का निवेश शेयरों में किया गया। पिछले साल की बात करें, तो साल 2018 में एफपीआई ने घरेलू पूंजी बाजार से 80,919 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।
विशेषज्ञों ने कहा है कि, यह सकारात्मक रुख 2020 में भी जारी रहेगा। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और घरेलू ऋण बाजार की स्थिति खराब होने से इसके नीचे जाने का जोखिम रहेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक, 2019 की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के स्पष्ट बहुमत से एफपीआई का उत्साह बढ़ा था। लेकिन बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर लगाने की घोषणा के बाद एफपीआई ने घरेलू बाजार से पैसे निकालने शुरू कर दिए। इसके बाद कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में कटौती की वजह से एफपीआई का भरोसा पुन: घरेलू बाजार में लौटा।
बता दें कि जब एक अंतरराष्ट्रीय निवेशक, किसी अन्य देश के उद्यम की निष्क्रिय होल्डिंग में निवेश करता है, यानी वित्तीय परिसंपत्ति में निवेश करता है, तो इसे एफपीआई के रूप में जाना जाता है।