सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजग सरकार का तीसरा बजट पेश किया। बजट ने जहां एक ओर किसी को खुश किया तो दूसरी ओर कुछ इससे निराश भी नजर आए। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में अकाउंटबिलिटी इनेशिएटिव की निदेशक यामिनी अय्यर के अनुसार सामाजिक क्षेत्र पर सरकार का नजरिये और साफ होने की जरूरत है।
उनके मुताबिक बजट में एक सकारात्मक बात सामने आई है। सरकार की ओर से एक राजनीतिक घोषणा की गई है कि सामाजिक क्षेत्र और नीतियों पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। पिछले साल यह सुनने को नहीं मिला था। पिछले साल की तुलना में सामाजिक क्षेत्र पर ज्यादा जोर दिख रहा है। सरकार ने सामाजिक नीति को लागू करने की इच्छा दिखाई है।
मगर फिर भी एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि सामाजिक क्षेत्र के लिए सरकार का क्या नजरिया है। वह अब भी साफ नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर कुछ खास कहा नहीं गया है। शिक्षा पर क्वालिटी की बात है मगर यह कैसे किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव होंगे और क्या कदम उठाए जाएंगे। कुछ स्पष्ट नहीं है।
स्वास्थ्य के लिए नई बीमा स्कीम शुरू होगी। मगर यह क्या होगी। क्या यह सार्वजनिक स्वास्थ्य पर आधारित होगी। यह स्पष्ट करने की जरूरत है। साथ ही लंबे समय से चल रही मांग को सरकार ने मान लिया है। योजनागत और गैर योजनागत व्यय के अंतर्गत आवंटन को खत्म करने से भी बजट में पारदर्शिता आएगी। नीति आयोग की सिफारिश के तहत 30 केंद्रीय योजनाओं तक सीमित रहने की बात को मानना भी बजट का सकारात्मक पहलू है।
‘सन सेट क्लॉज’ को भी खत्म करने का कदम बेहद सराहनीय है। पहले क्या होता था कि एक स्कीम शुरू होती थी मगर इसको बंद करने की तारीख नहीं होती थी। इसकी वजह से हजारों योजनाओं की उलझन सरकार के सामने पैदा हो जाती थी। अब सन सेट क्लॉज होने से यह उलझन खत्म होगी। सरकार ने फंड के प्रवाह पर भी बल दिया है। यह सकारात्मक बात है। साथ ही एक चीज देखने को मिल रही है कि आधार कार्ड और मोबाइल आधारित सेवाओं को सरकार ने आगे बढ़ाने की बात कही है और इसके लिए कानून लेकर आएगी।
हुनरमंद युवाओं से ही भारत श्रेष्ठ बनेगा
बजट पर भारतीय जनता पार्टी नेता और कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि हुनरमंद युवाओं से ही भारत श्रेष्ठ बनेगा। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं दुनिया भी पूरी तरह से बदल चुकी है। तकनीकी विस्फोट के बाद अब देश और दुनिया को आईए, बीए या एमए डिग्रीधारक युवाओं की जरूरत नहीं रही। दुनिया के उद्योगों को अब प्रशिक्षित युवा चाहिए।
ऐसे युवा जो किसी एक काम में पूरी तरह से दक्ष हों। आजादी हासिल करने के बाद मोदी सरकार की पूर्ववर्ती सरकारों ने स्थिति का ठीक से आकलन नहीं किया। यही कारण है कि देश में वर्तमान में पढ़े-लिखे युवाओं की तो भरमार है, मगर हुनरमंद युवा अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। केंद्र में नई सरकार के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल इस दिशा में सोचा बल्कि वक्त की जरूरत महसूस करते हुए तत्काल कौशल विकास के लिए अलग से मंत्रालय का गठन किया।
पहले साल हमने इस दिशा में पूरी ताकत लगाई। इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचा न होने के बावजूद नई सरकार ने अब तक 75 लाख युवाओं को हुनरमंद बनाया। हमारी योजना अब अगले तीन साल में एक करोड़ युवाओं को तकनीकी रूप से पूरी तरह से दक्ष करने की है। दरअसल इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले हमने देश और दुनिया की स्थिति का अध्ययन किया। उद्यमियों ने हमें कहा कि सामान्य डिग्री वाले युवाओं की उन्हें कोई जरूरत नहीं है।
उन्हें ऐसे युवा चाहिए जो किसी एक काम में पूरी तरह से दक्ष हो। यही कारण है कि आम बजट में ऑनलाइन तकनीकी शिक्षा देने से ले कर उद्योग जगत और शिक्षाविदों की भागीदारी से राष्ट्रीय कौशल विकास प्रमाणन बोर्ड बनाने का फैसला किया। इसके जरिए हमें उद्योग जगत ही बताएगा कि उन्हें किस तरह के पेशेवरों की जरूरत है।
सामान्य लेकिन प्रगतिशील बजट
निसान मोटर इंडिया के एमडी अरुण मल्होत्रा ने बजट को सामान्य लेकिन प्रगतिशील बजट बताते हुए कहा कि बजट में ऑटो क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया गया उल्टा 4 फीसदी तक उत्पाद कर बढ़ने से ऑटो की मांग प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि कीमत बढ़ने पर मांग हर हाल में प्रभावित होती है।
मल्होत्रा ने बताया कि इस बजट में अर्थव्यवस्था के निचले स्तर पर खास ध्यान दिया गया है जिसका लंबे समय में सकारात्मक परिणाम होगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में बढ़ोतरी के लिए मोटर वाहन कानून में बदलाव करने की घोषणा सराहनीय है। मल्होत्रा ने कहा कि हम इस बात को अब भी समझने में लगे है कि किस आधार पर 10 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कार पर एक फीसदी टीडीएस की कटौती की जाती है।
उन्होंने कहा कि बजट में वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लिए कोई रोडमैप नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि कर के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है जिसकी उम्मीद की जा रही थी। कुल मिलाकर इस बजट को कोई क्रांतिकारी नहीं कहा जा सकता है जिससे कोई बड़ा फर्क पड़ेगा।
पीएचडी चेंबर के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने केंद्रीय बजट 2016-17 की घोषणाओं की सराहना करते हुए कहा कि बजट जमीन से जुड़ा है। इसे ग्रामीण भारत पर केंद्रित किया गया है। अर्थ व्यवस्था में मांग पैदा करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है। देश के संपूर्ण विकास के लिए यह अच्छी शुरूआत है।
बजट सबके विकास का दस्तावेज है
भारती इंटरप्राइजेज लिमिटेड के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजन भारती मित्तल के मुताबिक यह बजट सबके विकास का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि सरकार जिस योजना को ध्यान में रख कर चल रही है, उसी का कार्यरूप यह बजट है। इसमें एक ओर जहां ढांचागत संरचना के विकास पर बल दिया गया है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए भी घोषणाएं की गई हैं।
बजट से ग्रामीण भारत को इस बार एक नई ताकत मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्र में ढांचागत संरचना विकसित होने और किसानों की आमदनी बढ़ने से उद्योग जगत को काफी लाभ होगा, क्योंकि ग्रामीण इलाकों से काफी मांग निकलेगी। कर प्रस्तावों के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें टैक्स डिडक्शन के सरलीकरण पर जोर दिया गया है, साथ ही कर विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए सरकार की प्रतिबद्धता झलकी है। यह सही मायने में इज आफ डूइंग बिजनेस की दिशा में उठाया गया कदम है।
डीएचएफएल के सीएमडी कपिल वाधवान के मुताबिक इस साल का केंद्रीय बजट आवास और वित्त क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला है। प्रस्तावित किफायती मकानों के निर्माण के लिए उपक्रमों पर शत प्रतिशत कटौती करने की योजना है। जिससे प्रधानमंत्री जी की योजना 2022 तक सभी के लिए आवास में मदद मिलेगी।
बजट से पीपीपी अनुबंधों के तहत प्रस्तावित आवास परियोजना और सड़क के बुनियादी ढांचों के विकास में निजी भागीदारी को मजबूती मिलेगी। डीडीटी छूट देना भी एक स्वागत योग्य कदम है। यह रियल स्टेट परियोजनाओं पर सकारात्मक रुख सुनिश्चित करेगा और निरंतर विकास में मदद करेगा।
वैश्विक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में बजट 2016 एक प्रगतिशील कदम
बजट को लेकर रेणु कर्णाद का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में बजट 2016 एक प्रगतिशील कदम है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करने के लिए अच्छा बजट प्रस्तुत किया है। बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, बुनियादी ढांचा, व्यापार और कर सुधारों के लिए प्रयास किया गया है।
3.5 राजकोषीय घाटे के बावजूद वित्तीय बाजारों के लिए विश्वास बनाना महत्वपूर्ण कदम है। टैक्स और ड्यूटी लाभ प्रदान करके मेक इन इंडिया पर सरकार का जोर भारत की विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत बनाना है। वित्त मंत्री ने देश के बुनियादी ढांचे, सड़क और हाइवे, रेलवे और 160 गैर कार्यात्मक एयरपोर्ट के विकास को दिशा दी है। केंद्रीय बजट में किफायती आवास पर अधिक जोर दिया गया है। 50 लाख रुपये से कम कीमत के घर पर 50 हजार रुपये की छूट दी गई है।
विशेष रूप से टू और थ्री टीयर शहरों में रहने वाले लोगों के लिए और मध्यम वर्ग को ऋण के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। 60 वर्ग मीटर तक के मकानों के निर्माण पर सेवा कर में छूट दी गई है। बजट में रिट्स पर डीडीटी को दूर करने का प्रयास किया गया है। हमें भारतीय बाजार में रिट्स की शुरूआत जल्द देखने को मिलेगी।
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को भविष्य में विश्व के टॉप शिक्षण संस्थानों में शामिल करने लिए 1000 करोड़ रुपये बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए दिए गए हैं। स्कूलों में डिजिटल प्रमाण पत्रों के लिए भी सरकार ने कारगर कदम उठाए हैं। कालेजों में डिग्री, पुरस्कार और अंक पत्रों को डिजिटल करने की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है। भारत 25 करोड़ से अधिक छात्रों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षण प्रणाली है।
शिक्षण संस्थानों में दस्तावेजों के डिजिटल होने पर पर्यावरण भी संतुलित होगा। यह न केवल छात्रों और अभिभावकों के लिए सुविधाजनक होगा बल्कि शिक्षण संस्थानों के लिए भी यह उच्च मूल्य का होगा। शिक्षा लोन से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए भी यह सुविधाजनक होगा। संभवत: यह एक पूरी शिक्षा परिस्थितिकी प्रणाली का एक विश्व स्तर का रिकार्ड बनाने के लिए आधार और पैन कार्ड से लिंक हो सकता है।
माननीय प्रधानमंत्री जी के विजन स्किल इंडिया के लिए बजट में 1700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत देश में 1500 बहु कौशल संस्थान खोलने का लक्ष्य रखा गया है। पहली बार बजट में देश के 2200 कॉलेज, 300 स्कूल और 500 सरकारी स्कूलों में उद्यमिता प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया है। 50 व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र ऑन लाइन कोर्सों के लिए खोले जाएंगे। वैश्विक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में वित्तमंत्री ने एक अच्छा यथार्थवादी संतुलन साधने का प्रयास किया है।
सभी क्षेत्र हैं समाहित
हीरो कॉरपोरेट सर्विस लिमिटेड के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल के मुताबिकबजट में सभी क्षेत्र को समाहित किया गया है। विकास पर फोकस किया गया है। ग्रामीण विकास से लेकर उद्यमिता बढ़ाने तक का ख्याल रखा गया है। इंफ्रा के लिए काफी कुछ किया गया है। सड़क, एयरपोर्ट, पोर्ट के विकास की बात की गई है। कॉरपोरेट जगत भी इस बजट से संतुष्ट है। क्योंकि बजट उसी लाइन पर तैयार किया गया है जैसी हमने उम्मीद की थी। हमारी तरफ से रखी गई मांगों के मुताबिक बजट है।
मैंने अभी पूरा बजट नहीं देखा है इसलिए मैं बहुत कुछ नहीं कह सकता हूं। लेकिन इतना कह सकता हूं कि इंफ्रा, कृषि, टैक्स व बैंक का बैलेंसशीट, सबका ध्यान रखा गया है। ग्रीन सेस लगने से ऑटो सेक्टर पर फर्कपड़ेगा। ग्रामीण अर्थव्यस्था को गति देने के लिए सिंचाई को मजबूत बनाने का प्रावधान बजट में किया गया है। उद्यमिता बढ़ाने के लिए स्किल अपग्रेडेशन के साथ उनके लिए क्लस्टर बनाने का प्रावधान किया गया है। टैक्स कुछ बढ़ा है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सभी क्षेत्र को बजट में कवर किया गया है। मुझे उम्मीद थी कि राजकोषीय घाटे में कुछ अधिक बढ़ोतरी होगी। लेकिन मुझे थोड़ा आश्चर्य है कि इसे समान स्तर पर बरकरार रखा गया है। लक्जरी गाड़ियों पर टैक्स बढ़ा है। किसी की भी कीमत बढ़ने से उसकी मांग पर असर बढ़ेगा। लेकिन हो सकता है ऐसा राजस्व प्राप्ति के लिए किया गया हो। कुल मिलाकर वित्त मंत्री जेटली ने कुछ रोचक किया है। उन्होंने छोटे-छोटे एरिया को छुआ है।
रियायती दर पर मिलेगा रसोई गैस कनेक्शन
केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इस बजट में गांव की गरीब महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने का पक्का इंतजाम किया गया है। बजट के बाद अमर उजाला से बातचीत में धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि इस बजट में भारत की गरीब महिलाओं के लिए एक जरूरी कदम उठाया गया है।
इन महिलाओं को सुबह-शाम धुएं से मुक्ति मिले इसे लिए सरकार ने 2000 करोड़ रुपये रुपये का प्रावधान किया है। इसमें मंत्रालय कुछ और राशि मिला कर आगामी वित्त वर्ष के दौरान देश भर में ग्रामीण एवं शहरी इलाकों के डेढ़ करोड़ गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत रियायती दर पर रसोई गैस कनेक्शन दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस समय एक गैस कनेक्शन लेने में करीब 3400 रुपये का खर्च आता है। उज्जवला योजना के तहत कनेक्शन लेने वालों को सरकार की तरफ से 1600 रुपये की भरपायी की जाएगी। शेष राशि कनेक्शन लेने वालों को देना होगा। इस योजना के तहत अगले तीन साल केदौरान देश भर में 5 करोड़ कनेक्शन देने की योजना है।
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि उज्ज्वला योजना में महिलाओं केनाम पर ही गैस कनेक्शन मिलेगा और कनेक्शन का आधार गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले परिवार होंगे।