कहने को तो खेलों के नाम पर भारी-भरकम सेट अप स्थापित कर रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर खेल मंत्रालय के अलावा विजय मल्होत्रा की अगुवाई में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर स्पोर्ट्स (एआईसीएस) तक स्थापित की गई है, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण में खेल एक बार फिर जगह नहीं बना पाया।
यहां तक खेल मंत्रालय की ओर से रियो ओलंपिक की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए 18 सौ करोड़ रुपये का बजट वित्त मंत्रालय से मांगा गया था, लेकिन खेलों के हिस्से में महज 1050 करोड़ रुपये ही आए हैं। पिछली बार भी खेलों को इतना बजट मिला था, लेकिन साल गुजरते ही इसे संशोधित कर 835 करोड़ कर दिया गया। खेलों और युवा मामलों का कुल बजट 15 सौ 92 करोड़ निर्धारित किया गया है।
जेटली के बजट में भाषण में खेलों को जगह नहीं मिलने के अलावा ऐसा पहली बार हुआ है जब हर मंत्रालय की डिमांड फॉर ग्रांट्स में खेलों पर हर मद के खर्चे को भी जगह नहीं दी गई है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, खेलो इंडिया और एनकरेजमेंट व अवार्ड्स में ही खेलों का सारा बजट दिखा दिया गया है।