क्या कच्चा तेल आगे भी इतना ही महंगा रहेगा? जानकारों का कहना है कि जब अमरीका से ज्यादा शेल ऑयल बाजार में आना शुरू होगा, तो क्रूड के दाम भी कम होने लगेंगे। सुदीप ने कहा, ''क्रूड इतना ज्यादा रहेगा, ऐसा नहीं लगता। मध्यम से लंबी अवधि में इसके दाम काबू में आ जाएंगे, लेकिन छोटी अवधि में मांग-आपूर्ति के बीच असंतुलन, ईरान जैसी भौगोलिक-राजनीतिक स्थितियों की वजह से छोटी अवधि में क्रूड की कीमतों पर दबाव रह सकता है।''
लीबिया में भी दिक्कतें जारी हैं। देश दो अलग-अलग सरकारों में बंटा हुआ है। एक हिस्से में तेल रिफाइनरी हैं और दूसरे हिस्से में नहीं हैं, ऐसे में वहां के हालात अजीबोगरीब बने हुए हैं।
कच्चा तेल और रुला सकता है
भारत को कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा ईरान से मिलता है और अमरीका की अगुवाई में इस देश पर आने वाले वक्त में कई पाबंदियां लग सकती हैं, ऐसे में क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ जाएंगे?
सुदीप ने कहा, ''जी बिल्कुल, यही नहीं। बल्कि ऐसा हुआ तो दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ जाएंगे। इन्हीं सब शंकाओं की वजह से बाजार में दिक्कत है।'' इन हालात में छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए, उन्होंने कहा, ''ये बात सही है कि बड़ी गिरावट टेंशन बढ़ा देती है, लेकिन इस कमजोरी में भी कुछ मजबूत शेयर ऐसे हैं, जो किफायती दामों पर उपलब्ध हैं।''
रुपए की कमजोरी और तेल का उछलना, इन दोनों वजह के अलावा जिस तीसरे कारण ने बाजार को गिराया, वो इंफ्रा सेक्टर की ग्रोथ में कमी है। अगस्त में आठ इंफ्रा सेक्टरों की ग्रोथ धीमी होकर 4.2 फीसदी तक आ गई।
इसकी वजह है क्रूड ऑयल और फर्टिलाइजर के उत्पादन में गिरावट। कोर सेक्टर जुलाई में 7.3 फीसदी बढ़े थे, लेकिन अगस्त में खेल बदल गया। इसके अलावा एशियाई बाजारों में मंदी रही जिसका असर भारतीय शेयर मार्केट पर भी हुआ।