क्या आप जानते हैं कि आप अपने बिल और लोन को एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर सकते हैं। वह भी क्रेडिट कार्ड के जरिए। वैसे तो इसे बैलेंस ट्रांसफर के रूप में जाना जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल ब्याज के बोझ को कम करने के लिए किया जा सकता है।
बड़ी देनदारी को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड्स में बांटिए
अक्सर देखा गया है कई लोग किसी क्रेडिट कार्ड की बड़ी देनदारी को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड्स में बांट देते हैं। आंशिक भुगतान से आपकी देनदारी तो कम हो सकती है, लेकिन बाकी की देनदारी पर सालाना 40 प्रतिशत तक का ब्याज देना पड़ सकता है। बैलेंस ट्रांसफर से आप इतना ज्यादा ब्याज देने से बच सकते हैं। क्रेडिट कार्ड देने वाले कई बैंक ऐसे हैं जिनमें दूसरे बैंक के क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम ट्रांसफर कर दें तो वे कुछ महीनों (प्रायः 6 महीनों) तक ब्याज नहीं लेते। हां, इसके लिए प्रोसेसिंग फीस जरूर देना पड़ती है। कुछ मामलों में आपको कुल आउटस्टैंडिंग पर हर महीने 1 से 2 प्रतिशत तक की दर से ब्याज देना पड़ता है।
ऐसे उठाएं लाभ?
छह महीने तक ब्याज देने से मिली छूट एक बड़ी राहत होती है क्योंकि इस बीच आप कर्ज चुकाने के लिए पूरी रकम जुटाने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि, जब ब्याज मुक्त अवधि में आउटस्टैंडिंग क्लियर नहीं कर पाने की स्थिति में सामान्य दर से ब्याज लागू हो जाता है। कुछ कार्ड्स ऐसे भी होते हैं जिनमें 6 महीने से पहले बैलेंस ट्रांसफर की सुविधा नहीं होती है।
तीन प्वाइंट्स में समझें अपनी जरूरत
1.ऐसा करते वक्त नए बैंक के क्रेडिट कार्ड की प्रोसेसिंग फीस और उसके ब्याज दर के बारे में अच्छे से पता कर लें। कुछ परिस्थितियों में इसमें छुपे चार्ज लगे होते हैं।
2.जब आप मौजूदा क्रेडिट कार्ड का बकाया नहीं चुका सकते और नौबत भारी-भरकम ब्याज देने की हो जाए तब आप क्रेडिट ट्रांसफर कर सकते हैं।
3 .आप उसी बैंक को चुनें जो अपने क्रेडिट कार्ड में बैलेंस ट्रांसफर पर आपको बकाया चुकाने का पर्याप्त वक्त दे दे ताकि आप उस दौरान फंड जुटा सकें।