भारत के तमाम सरकारी बैंकों का वित्त वर्ष 2018-19 में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बकाया है जोकि विलफुल डिफॉल्टर्स से लेना है। इस रकम में से एक-तिहाई हिस्सा केवल भारतीय स्टेट बैंक का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यह जानकारी मंगलवार को दी।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले स्टेट बैंक पर 46,158 करोड़ रुपये विलफुल डिफॉल्टर के तौर पर बकाया है, जो उसे ऐसे लोगों से वसूलना है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पंजाब नेशनल बैंक है, जिसका 25090 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। तीसरे स्थान पर बैंक ऑफ इंडिया है, जिसका 9890 करोड़ रुपया फंसा हुआ है।
भारतीय रिजर्व बैंक के डाटानुसार, सरकारी बैंकों का 31 मार्च 2019 तक 63820 करोड़ रुपये का ग्रॉस लोन फंसा हुआ है। इस कारण से बैंकों का एनपीए भी कम नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि इस वक्त तीन बड़े विलफुल डिफॉल्टर विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी हैं, जो देश के बाहर हैं। इनको भारत लाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि इनके अलावा और भी कई लोग हैं, जिन पर कानून का शिंकजा कसा जा चुका है।
अब केंद्र सरकार ने बैंकों को भी अपनी तरफ से ऐसे लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने का आदेश जारी कर दिया है। ऐसे में कोई भी बैंक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एलओसी जारी करने के लिए जांच एजेंसियों को लिख सकता है।
2014-15 में विलफुल डिफॉल्टर की संख्या 5,349 थी, जो मार्च 2019 में बढ़कर 8,582 हो गई। इसके साथ ही 2017-18 में 7,535 और 7,079 को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया गया। यह आंकड़ा केवल सरकारी बैंकों का है। इसमें निजी बैंकों का आंकड़ा शामिल नहीं है।
मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के आंकड़ों के मुताबिक विगत पांच वर्षों में 7,654 करोड़ रुपये की राशि इन डिफॉल्टर से वसूल की गई। लोकसभा में कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल और श्रीरंग अप्पा बारणे के प्रश्नों के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि 31 मार्च, 2019 तक राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा 8,121 मामलों में वूसली के लिए मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं।
तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के मुताबिक फ्रॉड में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का तकरीबन 11 हजार करोड़ रुपया फंसा था। शुक्ला ने कहा था कि पब्लिक बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 तक 2,108 एफआईआर विलफुल डिफॉल्टरों के खिलाफ दायर की थीं। वहीं 8,462 मामलों में बैंकों ने कुर्की का मामला दायर किया था।
सरकारी बैंकों से मिले डाटा के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक 8,121 मामलों में रिकवरी के लिए मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। सिक्योर्ड एसेट्स के मामले में 6251 केस में सरफेशी एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भारत में 17 सरकारी बैंक हैं।