साल 2019 में रेपो रेट के रिकॉर्ड पांच बार लगातार कटौती करने के बाद रिजर्व बैंक नए वित्त वर्ष की शुरुआत सख्त फैसलों के साथ कर सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2020-21 में राजकोषीय घाटा बढ़ने के दबाव के कारण आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.5 फीसदी रखा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बार फिर संशोधित कर दिया है और इसे पूर्व के लक्ष्य से 0.5 फीसदी बढ़ाकर 3.8 फीसदी कर दिया है। यह लगातार तीसरा साल है जब सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक रही है। इसे देखते हुए बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने सरकार के लक्ष्य पर एक बार फिर संकट जताया है, जो तय लक्ष्य से 0.30 फीसदी तक ऊपर जा सकता है। गोल्डमैन सॉक्स ने कहा है कि सरकार को अभी लक्ष्य के मुताबिक राजस्व की वसूली नहीं हो पा रही है, जो उसके खर्च में कटौती का कारण बन सकता है। साथ ही उस पर बढ़ती महंगाई का दबाव भी है, जो आरबीआई के अनुमानित लक्ष्य से ऊपर जा चुकी है। सॉक्स के साथ सिंगापुर के निवेश बैंक डीबीएस ने भी कहा है कि आगामी एमपीसी बैठक में रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज से शुरू हो गई है। मौद्रिक नीति समिति छह फरवरी को फैसला लेेेगी। इसमें रेपो रेट पर कोई फैसला करते समय खुदरा महंगाई को ध्यान में रखा जाएगा, जो पांच फीसदी से ज्यादा पहुंच चुकी है। जनवरी में खुदरा महंगाई के 6.7 फीसदी पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
बता दें कि रिजर्व बैंक ने सोमवार का बताया कि 17 जनवरी को समाप्त पखवाड़े तक बैंकों ने 7.21 फीसदी ज्यादा कर्ज बांटे। इस तरह बैंकों की ओर से दिए गए कर्ज की कुल राशि 100 लाख करोड़ पार कर गई। इस दौरान बैंक जमाओं में भी 9.51 फीसदी इजाफा हुआ।