रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दरें तय करने वाले अधिकार प्राप्त पैनल मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की इस सप्ताह की शुरुआत में हुई बैठक में प्याज की महंगाई के मुद्दे पर भी गौर किया गया। हालांकि इस द्वैमासिक बैठक में प्रमुख नीतिगत दरों (रेपो) में कोई बदलाव नहीं किया गया। बृहस्पतिवार को जारी एमपीसी बैठक के ब्योरे में इस बात का खुलासा हुआ। सितंबर के बाद से प्याज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और शुक्रवार को इसकी कीमत 130-140 रुपये प्रति किलो रही।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘सितंबर में महंगाई तेजी से बढ़ी और अक्तूबर में सब्जियों की कीमतों में खासा इजाफा हुआ, क्योंकि देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश के चलते खरीफ की फसल को खासा नुकसान हुआ। इसके चलते मुख्य रूप से प्याज की कीमतों में खासा इजाफा हुआ।’ दास की अगुआई वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने आर्थिक सुस्ती के बावजूद पांच दिसंबर को हुई बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया था।
दास के अलावा एमपीसी के पांच अन्य सदस्यों चेतन घाटे, पामी दुआ, रविंद्र एच ढोलकिया, माइकल देवव्रत पात्रा और बिभू प्रसाद कानूनगो ने रेपो दर को 5.15 फीसदी के स्तर पर बरकरार रखने के पक्ष में वोट दिया।
रेपो रेट के फैसले के अतिरिक्त आरबीआई ने जीडीपी का अनुमान भी जताया था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को झटका लगा है।
बता दें कि दिसंबर, 2018 में शक्तिकांत दास के गवर्नर पद संभालने के बाद से आरबीआई ने हर एमपीसी बैठक में रेपो दरें घटाई हैं। लेकिन इस बार इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। 2019 में छह बार की बैठक में कुल 1.35 फीसदी की कटौती की जा चुकी है। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था को गति मिलना तो दूर, लगातार गिरावट दिख रही है।