बैंक ने खोले थे डमी खाते
सूत्रों ने बताया कि, पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे। पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस ने गलत तरीके से एचडीआईएल की मदद की थी। बैंक ने कुल कर्ज का 73 फीसदी यानी 6,226 करोड़ रुपये एचडीआईएल को दिए थे। बता दें कि रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख कंपनी एचडीआईएल अब दिवालिया हो गई है।
कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा एचडीआईएल को
मामले में एक सूत्र ने बताया कि, 'यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है।
एक महीने पहले दिया लोन
बैंक ने एक माह पहले ही एचडीआईएल के मालिक सारंग वधावन को यह पर्सनल लोन दिया था ताकि वो बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए लोन की भरपाई कर सकें। बैंक ऑफ इंडिया ने लोन की किश्त जमा नहीं करने पर एचडीआईएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर की थी। बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी ने 520 करोड़ रुपये का लोन ले रखा था।
आरबीआई ने कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्शन 35ए के तहत की है। प्रतिबंध सेक्शन 35 A के तहत लगाया गया है।