मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कटौती किए जाने से हर तरह के कर्ज के सस्ता होने का रास्ता साफ हो गया है। बैंकों द्वारा इसे अमली जामा पहनाए जाने के बाद होम लोन, कार लोन के साथ-साथ उद्योग जगत को भी सस्ती दर पर पूंजी उपलब्ध होगी।
इससे न केवल आम आदमी की जेब पर मासिक किस्तों (ईएमआई) का बोझ कम होगा बल्कि अर्थव्यवस्था के विकास की गति भी तेज होगी। आरबीआई के इस फैसले से जहां कर्ज लेने वाले लोगों को राहत मिलेगी वहीं बैंक जमा में निवेश करने वालों का रिटर्न घटेगा।
अगर बैंक ब्याज दर घटाएंगे तो जमा दरों में कटौती भी करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक यदि ब्याज दर कम करते हैं तो आरबीआई को आगे चौथाई फीसदी और रेपो रेट कम कर सकता है।
रिजर्व बैंक ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कटौती की और इसे 6.75 फीसदी से घटा कर 6.50 फीसदी कर दिया है।
यही नहीं, अर्थव्यवस्था में पर्याप्त तरलता रहे, इसके लिए रिजर्व बैंक ने बैंकों का दैनिक कैश रिजर्व रेशियो 95 फीसदी से घटा कर 90 फीसदी कर दिया है। हालांकि, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह चार फीसदी के पूर्व स्तर पर ही है। आरबीआई ने नकदी की मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) पर ब्याज 0.75 फीसदी घटा दिया है और रिवर्स रेपो रेपो दर में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी की है ताकि अल्पावधि के कॉल मनी दरों का रेपो दर से बेहतर तालमेल हो सके।
हालांकि, इसी के साथ जमाओं पर मिलने वाली ब्याज दर भी घट जाएगी। इससे पहले सरकार छोटी बचत योजनाओं की जमा दरें घटा चुकी है। रिजर्व बैंक की इस कटौती के बाद रेपो रेट मार्च 2011 के बाद के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। इससे मोटर वाहन, कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स और रीयल इस्टेट क्षेत्र खासा उत्साहित है क्योंकि लोन सस्ता होने पर उनकी बिक्री बढ़ेगी।