खाद्य उत्पादों की कीमतों में उछाल के कारण मई में खुदरा महंगाई सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। एक सर्वे में अधिकतर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि उपभोक्ता आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में बढ़कर 3.01 फीसदी हो सकती है, जो अप्रैल में 2.92 फीसदी रही थी। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस बार खुदरा महंगाई 3.50 फीसदी तक जा सकती है।
सर्वे में इस बात पर राहत जताई गई कि महंगाई का यह अनुमान आरबीआई के लक्ष्य से कम रहेगा। यह लगातार 10वां महीना होगा जब खुदरा महंगाई 4 फीसदी से नीचे रहेगी, लेकिन अक्तूबर के बाद इसके जोर पकड़ने की आशंका है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री समीर नारंग का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें मार्च से ही बढ़ रही हैं और खुदरा महंगाई में इनकी हिस्सेदारी आधे से ज्यादा होती है। इस बार देरी से होने वाली मानसून पूर्व बारिश भी सामान्य से कम रहेगी, जिससे सब्जियों और फलों का उत्पादन घटेगा और कीमतों में इजाफा होगा। इससे खुदरा महंगाई अक्तूबर 2018 के 3.38 फीसदी के बाद मई में सबसे ज्यादा हो सकती है।
महंगाई से ज्यादा जीडीपी की चिंता
एशियाई अर्थव्यवस्था के जानकार गिग्वेल चांको का कहना है कि आरबीआई की चिंता अभी महंगाई को लेकर नहीं है, बल्कि उसका पूरा जोर जीडीपी की वृद्धि दर बढ़ाने पर है। पिछले वित्त वर्ष के अंतिम तिमाही में विकास दर 5.8 फीसदी रही, जो दो साल में पहली बार चीन से कम हुई है। इसी कारण आरबीआई ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की और अगली तिमाही के महंगाई अनुमानों को भी बढ़ा दिया।