रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धीरे-धीरे और लगातार तेजी की वापसी की उम्मीद है, कारपोरेट सेक्टर जीएसटी के साथ खुद को समायोजित करेंगे और इसके कारण निजी निवेश बढ़ने की संभावना है, इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ सकती है और सरकारी सहायता की वजह से कारपोरेअ व बैंक बैलेंस शीट में सुधार आने की उम्मीद है।
ईएससीएपी ने कहा कि कराधान प्रणाली में सुधार और कर वसूली में बढ़ोतरी के कारण म्यांमार और ताजिकिस्तान जैसे कुछ देशों में जीडीपी में आठ फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि चीन, भारत और इंडोनेशिया जैसे अपेक्षाकृत बड़े देशों में इसके कारण जीएसटी में करीब 3-4 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
ब्याज दर घटाने भर से ही नहीं बढ़ेगा निवेश
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में कारपोरेट क्षेत्र और बैंकों के कमजोर बैलेंस शीट के कारण निवेश की गति में भी गिरावट आई है, इसलिए सिर्फ नीतिगत दरों में कटौती करना ही भारत में निवेश में तेजी लाने के लिए काफी नहीं होगा।
भारत में नई दिवालिया संहिता और सरकारी बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण पैकेज से निजी निवेश में धीरे-धीरे वापस तेजी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है, जिसके कारण खपत में तेजी आ रही है।