देश में बैंकों के प्रदर्शन और कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को गति देने के मामले में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए 25 अगस्त 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी। देश में पिछले साल मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत होने के बाद से यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकारी बैंकों के प्रमुखों की आमने-सामने की पहली समीक्षा बैठक है।
इसलिए अहम है बैठक
सूत्रों के अनुसार मांग और खपत बढ़ाने के लिए बैंक क्षेत्र के महत्व को देखते हए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ होने वाली यह बैठक महत्वपूर्ण है। मालूम हो कि हाल ही में वित्त मंत्री ने कहा था कि वे महामारी से प्रभावित आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगी।
इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, 25 अगस्त को होने वाली इस बैठक में बैंकों की स्थिति, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एलान की गई पुनर्गठन- दो योजना की प्रगति की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही इस बैठक में बैंकों को उत्पादक क्षेत्रों को कर्ज बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की भी समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार निर्मला सीतारमण फंसे कर्ज यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की स्थिति का भी जायजा ले सकती हैं। साथ ही बैंकों के अलग-अलग सुधार उपायों पर भी चर्चा होगी।
एनपीए में आई कमी
यह बैठक मुंबई में होगी। गौरतलब है कि सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों से 31 मार्च 2021 को बैंकों का एनपीए कम होकर 6,16,616 करोड़ रुपये (अस्थायी आंकड़ा) पर आ गया। जबकि 31 मार्च 2020 को यह आंकड़ा 6,78,317 करोड़ रुपये था। जबकि इससे पहले 31 मार्च 2019 को एनपीए 7,39,541 करोड़ रुपये रहा था।