वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वो जल्द से जल्द अपने यहां पर भ्रष्टाचार के लंबित मामलों की जांच को जल्द पूरा करें। गौरतलब है कई बैंकों के अधिकारियों के ऊपर भ्रष्टाचार के मामले में जांच चल रही है।
फंसे कर्ज को लेकर रिजर्व बैंक के सख्त रुख का असर दिखने लगा है। पिछले एक साल में सरकारी और निजी बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। आरबीआई ने मंगलवार को बैंकिंग क्षेत्र के रुझान और प्रगति रिपोर्ट 2018-19 में बताया कि बैंकों का सकल एनपीए सात वर्षों में पहली बार नीचे आया है, जबकि वास्तविक एनपीए भी कम हुआ है।
दरअसल, फंसे कर्ज की पहचान को लेकर रिजर्व बैंक की प्रक्रिया पूरी होने को है। आरबीआई ने इससे पहले बैंकों की वास्तविक स्थिति का खुलासा किया है। रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सितंबर 2019 तक बैंकों का सकल एनपीए घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है, जो वित्त वर्ष 2018 की समान अवधि में 11.2 फीसदी थी। इसी तरह, वास्तविक एनपीए में भी कमी आई है और यह 2018 के 6 फीसदी से गिरकर सितंबर में 3.7 फीसदी पर आ गया है। आरबीआई के अनुसार, लगातार सात वर्षों तक इजाफे के बाद सभी बैंकों का सकल एनपीए 2018-19 में पहली बार नीचे आया है।
आरबीआई का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार का असर सकल एनपीए और वास्तविक एनपीए पर दिखा है। इसके अलावा सकल एनपीए के बकाए में गिरावट और स्लीपेज अनुपात में कमी से भी एनपीए नीचे आया है। सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 2019 में घटकर 11.6 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 14.6 फीसदी था। वास्तविक एनपीए भी 2018 के 8 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया है। वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 5.3 फीसदी से घटकर 4.7 फीसदी और वास्तविक एनपीए 2.4 फीसदी से 2 फीसदी हो गया है।
रिजर्व बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2019 में कृषि क्षेत्र को दिए गए कर्ज में एनपीए बढ़ा है, जो 2020 की पहली छमाही में भी जारी है। इस पर सबसे ज्यादा असर उन राज्यों में हुआ है, जहां 2018 और 2019 में किसानों का कर्ज माफ किया गया। हालांकि, सबसे ज्यादा सकल एनपीए के मामले में 17.4 फीसदी के साथ उद्योग क्षेत्र अब भी शीर्ष पर है। इस क्षेत्र में कुल एनपीए राशि का दो तिहाई शामिल है।