अभिभावक या माता-पिता की गलती की सजा बच्चों को न मिले, इसी फॉर्मूले पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने काम किया है। खराब सिबिल स्कोर वाले व्यक्ति, जिसे बैंकरों की भाषा में डिफॉल्टर कहा जाता है, के आश्रितों को भी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए शिक्षा ऋण दिलाने की पहल मंत्रालय ने की है।
ऐसे परिवार के बच्चों को भी अब पढ़ने के लिए लोन मिल जाएगा, बशर्ते उनके परिवार के कोई जिम्मेदार और आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति उस लोन अकाउंट का को-बॉरोअर बन जाए।
सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूं तो उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को चार लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर किसी किस्म के जमानतदार की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही केंद्र सरकार के क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर एजुकेशन लोन (सीजीएफएसईएल) के तहत भी बिना किसी जमानतदार या कोलेटरल गारंटी के ऋण दे दिया जाता है। लेकिन इन सब मामलों में विद्यार्थी के माता-पिता या अभिभावक का क्रेडिट रिकॉर्ड या सिबिल रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से चेक किया जाता है।
अगर उनका क्रेडिट स्कोर खराब है, तो उन्हें ऋण देने से मना कर दिया जाता है। लेकिन इस बारे में कई सामाजिक संगठनों के साथ ही कई राज्यों से सुझाव आया कि माता-पिता या अभिभावक का क्रेडिट स्कोर खराब करने में बच्चे का कोई योगदान नहीं होता है, इसलिए बच्चों को ऋण देने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाए।
सरकार ने दिया बैंकों को सुझाव
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इसके बाद सरकार की तरफ से बैंकों को इस बारे में सुझाव दिया गया कि जिन बच्चों के माता-पिता या अभिभावक का क्रेडिट स्कोर खराब है, उनके लोन अकाउंट में किसी अन्य रिश्तेदार, जिनकी आमदनी के साथ क्रेडिट स्कोर भी बढ़िया हो, को भी ज्वाइंट या को बोरोअर बनाया जाए। इस तरह से बैंक का पैसा भी नहीं डूबेगा और खराब क्रेडिट रिकॉर्ड वाले व्यक्ति के बच्चों को शिक्षा के लिए ऋण भी मिल जाएगा।
शीर्ष संस्थानों को प्राथमिकता
एक अग्रणी सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पहले शिक्षा ऋण देने में मानवीय रुख अपनाया जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा ऋण खातों के एनपीए में बदलने से अब बैंक भी सतर्क हो गए हैं।
उनका कहना है कि आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम या सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को तो आसानी से ऋण दे देते हैं, लेकिन निजी क्षेत्र के महाविद्यालयों या इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को लोन देने से पहले अनिवार्य रूप से सिबिल स्कोर के मानक का ध्यान रखा जाता है।
बढ़ते एनपीए से बैंकों का रुख सख्त
क्रेडिट इन्फोर्मेशन कंपनी क्रिफ हाई मार्क की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2016-17 में बैंकों का शिक्षा ऋण क्षेत्र में सकल एनपीए बढ़कर जहां 21 फीसदी हो गया, वहीं सिर्फ आलोच्य वर्ष में ही इसका एनपीए 10.2 फीसदी रहा।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सभी बैंकों ने शिक्षा ऋण के मद में करीब 20,000 करोड़ रुपये जारी किए, जबकि एक साल पहले इस मद में करीब 17,000 रुपये जारी किए गए थे। इनमें अधिकतर राशि सरकारी क्षेत्र के बैंकों की तरफ से दी गई है।