आवासीय लोन, कार लोन, पर्सनल लोन से लेकर एक दिन के अल्पावधि लोन लेने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले सस्ती ब्याज दर का फायदा मिलना शुरू हो गया है। बैंकों ने ब्याज दर की गणना प्रणाली में बदलाव करना शुरू कर दिया है। पिछले महीने तक बैंक बेस रेट के आधार पर लोन के लिए ब्याज दर तय करते थे लेकिन अब कोष जुटाने की सीमांत लागत के आधार पर (एमसीएलआर) ब्याज दर तय की जा रही है।
भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक समेत करीब 10 बैंकों ने इसे घोषित भी कर दिया है। एक सरकारी बैंक के अधिकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक के निर्देश पर बैंकों ने शुक्रवार से कोष जुटाने की सीमांत लागत के आधार पर एमसीएलआर घोषित करना शुरू कर दिया है। इस प्रणाली को एक अप्रैल 2016 से ही लागू करना है।
उन्होंने बताया कि पहले जब कर्ज की दर को तय किया जाता था, तब उसमें कोष जुटाने की लागत, परिचालन लागत के साथ कुछ मार्जिन और देयताओं का भी ध्यान रखा जाता था। लेकिन अब जो नया निर्देश आया है, उसके मुताबिक कर्ज की दर तय करने में कोष जुटाने की लागत, जिसे बैंक की भाषा में एलोकेटेड कॉस्ट कहते हैं, के साथ साथ अनएलोकेटेड कॉस्ट को ही शामिल करते हैं।
अनएलोकेटेड कॉस्ट में बैंक की शाखा चलाने का खर्च, क्षेत्रीय कार्यालय चलाने का खर्च और मुख्यालय चलाने के खर्च के साथ साथ सभी तरह की प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लागतें शामिल रहती हैं। इसमें मार्जिन पर तवज्जो नहीं दिया जाता है। इसलिए यह पुरानी गणना पद्घति (बेस रेट) के मुकाबले ग्राहकों के लिए सस्ता पड़ेगा।
उदाहरण के लिए भारतीय स्टेट बैंक का पहले बेस रेट 9.3 फीसदी था, जो एमसीएलआर में घटकर 9.2 फीसदी रह गया है। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक का पहले बेस रेट 9.60 फीसदी था, जो कि एमसीएलआर में घट कर 9.4 फीसदी रह गया है। आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक ने भी अपना एमसीएलआर घटा कर 9.2 फीसदी कर दिया
है।