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सड़क पर उतरे तीन लाख कर्मचारी, बैंकिंग सेवाएं बाधित होने से ग्राहकों को हुई परेशानी

Tue, 22 Oct 2019 06:41 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : अमर उजाला
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सरकार के बैंक विलय के विरोध में बैंक कर्मचारी संगठनों ने मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल रखी। इस दौरान सरकारी बैंकों के करीब तीन लाख कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा और सड़कों पर उतर आए। हड़ताल से चेक भुगतान और जमा-निकासी जैसी बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से बाधित रहीं, जिससे त्योहारों से पहले ग्राहकों को समस्या का सामना करना पड़ा।

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कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बना रही है। कहने को तो यह विलय है, लेकिन देखा जाए तो यह छह सरकारी बैंकों की हत्या जैसा है। देश में कुल बैंकिंग संपत्तियों में से दो तिहाई तो सरकारी बैंकों के पास ही है। 

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संगठन के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि कर्मचारियों के कामकाज बंद रखने से नकदी जमा-निकासी, चेक भुगतान, एटीएम संचालन जैसी सेवाओं पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि हमारी तैयारी आंदोलन का स्तर और बड़ा करने की थी, जिसमें कम से कम 10 लाख कर्मचारियों को शामिल किया जाना था, ताकि सरकार पर विलय के फैसले को बदलने के लिए दबाव बनाया जा सके। 
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उन्होंने कहा कि सरकार इससे पहले एसबीआई, देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय का कदम उठा चुकी है, जिससे करीब 3,000 बैंक शाखाएं बंद हो चुकी हैं। अब विलय के नए कदम से भी 2,000 शाखाओं के बंद होने का खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े कारोबारियों के कर्ज नहीं चुकाने का खामियाजा बैंकों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। हड़ताल में बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य भी शामिल रहे। 

विलय प्रक्रिया पर असर नहीं : बैंक

एक सरकारी बैंक के सीईओ ने कहा कि कर्मचारी संगठनों की हड़ताल का असर बैंकों की विलय प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा की विलय प्रक्रिया के दौरान भी इसी तरह के विरोध के स्वर उठे थे, जो धीरे-धीरे शांत हो गए। लिहाजा इस तरह के हड़ताल से विलय की योजना कतई प्रभावित होने वाली नहीं है। 

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