राजस्व में आई कमी के चलते केंद्र सरकार जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से वित्तीय मदद मांगने की तैयारी में है। आर्थिक सुस्ती के चलते जीएसटी संग्रह में हुई कमी के चलते केंद्र सरकार जल्द यह कदम उठाने जा रही है। यह मदद सरकार आरबीआई से अंतरिम लाभांश के तौर पर लेगी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई को पिछले वित्तीय वर्ष में 1.23 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। आरबीआई को ज्यादातर लाभ करेंसी की ट्रेडिंग और सरकारी बॉन्ड से होता है। इसका कुछ हिस्सा आरबीआई अपने परिचालन और आपात निधि के तौर पर रखती है। बाकी का लाभ सरकार के पास लाभांश के तौर पर चला जाता है।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार चाहती है कि आरबीआई उसकी लाभांश की मांग को समझे, क्योंकि इस वित्त वर्ष में आर्थिक सुस्ती के चलते विकास दर 11 साल के सबसे निचले स्तर (पांच फीसदी) रह सकती है। सरकार पर अभी भी 35 से 45 हजार करोड़ रुपये का बकाया है, जिसका उसे भुगतान करना है। ऐसे में आरबीआई से मिली वित्तीय मदद से सरकार को राहत मिल सकती है।
अगर आरबीआई केंद्र सरकार की मांग को मान लेती है, तो फिर यह लगातार तीसरा साल होगा, जब सरकार के पास अंतरिम लाभांश आएगा। हालांकि आरबीआई के कुछ अधिकारी सरकार को यह लाभांश देने का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे कई मोर्चों पर केंद्रीय बैंक को दिक्कत आ सकती है। हालांकि आरबीआई के बोर्ड में सरकार की तरफ से काफी सदस्य होने के कारण ऐसी मंजूरी मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
सरकार को चालू वित्त वर्ष में करीब 19.6 लाख करोड़ रुपये राजस्व की कमी हुई है। आर्थिक सुस्ती के अलावा कॉर्पोरेट करों में कमी का असर देखने को मिला है। इससे राजस्व में करीब 34-37 फीसदी की कमी है, जिसको लाभांश मिलने के बाद 25 फीसदी तक लाया जा सकता है।