बैंकिंग विशेषज्ञ अतुल सिंह के मुताबिक पीपीबी की सेवाएं पूरी तरह से आधार पर टिकी थीं। चिट्ठी पहुंचाने की तर्ज पर डाकिया बायोमिट्रिक मशीन पर आपके अंगूठे की छाप लेकर खाते में जमा धन में से पांच हजार रुपये तक ग्राहक को मुहैया करा सकता था। जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभव नहीं है।
यह संभव है कि दूरसंचार मंत्रालय क्यूआर कोड या मोबाइल ओटीपी के माध्यम से यह सेवा मुहैया कराए, लेकिन ऐसा करने पर यह व्यवस्था पहले जैसी पुख्ता नहीं मानी जा सकेगी। साइबर विशेषज्ञ रामानुज के मुताबिक क्यूआर कोड और मोबाइल ओटीपी के जरिए बैंकिंग सेवा को तभी मजबूत माना जा सकता है, जब उपभोक्ता दोनों ही तरीकों से परिचित हो या उनके प्रति जागरूक हो। आधार की बायोमिट्रिक व्यवस्था में बिना पढ़े-लिखे व्यक्ति के साथ भी धोखाधड़ी करना मुमकिन नहीं था।
मनरेगा भुगतान में भी होगी दिक्कत
गौरतलब है कि मनरेगा समेत तमाम केंद्रीय योजनाओं में लाभार्थियों का सत्यापन आधार के जरिए करके उनके खातों में पैसा भेजा जाता रहा है। जबकि अब सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग सेवाओं में आधार के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी है। परिणामस्वरूप लाभार्थी का आधार बैंक खाते से लिंक नहीं होने पर इस मामले में भी अन्य विकल्प का रुख सरकार को करना होगा।