सीबीआई और ईडी की जांच में न केवल बैंक अधिकारियों बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के ऑडिट प्रोसेस पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) का रिनुयल भी गलत तरीके से किया। अगर आरबीआई के ऑडिटर ने पीएनबी के SWIFT मैसेज को देखा होता, तो फिर इस घोटाले का पहले ही पर्दाफाश हो जाता।
नीरव मोदी को मिले 150 एलओयू
नीरव मोदी और उनके रिश्तेदारों को 2011 से 2017 के बीच 150 एलओयू जारी किए गए । इनकी मदद से उसने 11 हजार करोड़ रुपये कई बैंकों की विदेश में स्थित शाखाओं से निकाले, जो अब पीएनबी को देने होंगे।