इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनी याहू ने एक बार फिर अपने एक अरब से अधिक यूजर्स के निजी डाटा चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई है। ये सभी आंकड़े 2013 के हैं और इससे तीन महीने पहले भी कंपनी ने इसी तरह की शिकायत की थी।
कंपनी का कहना है कि किसी कंपनी के लिए यह सबसे बड़ी चोरी है और वह इसकी जांच कर रही है। कंपनी के बयान के मुताबिक, कंपनी समझती है कि अगस्त 2013 में किसी अनधिकृत तीसरे पक्ष ने एक अरब से अधिक यूजर्स के अकाउंट्स से निजी जानकारी चुराई है।
हालांकि ताजा मामला 22 सितंबर 2016 को चोरी के खुलासे की घटना से अलग है जिसमें 50 करोड़ यूजर्स के प्रभावित होने की बात थी। इस घटना से याहू की 4.8 अरब डॉलर की मुख्य परिचालन संपत्तियां वेरीजोन के हाथों बेचे जाने के सौदे में खतरा पैदा हो गया है।
जहां तक भारत का सवाल है तो आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक, यहां 9 नवंबर के बाद डिजिटल लेनदेन में 400 से 1000 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस लेनदेन योजना याहू के ताजा घटनाक्रम से खतरे में पड़ सकती है। आईटी सचिव अरुणा सुंदरराजन कहती हैं, ‘सरकार इस मामले पर पूरी तरह सतर्क है। हमने अपने सभी सिस्टम को तत्काल अलर्ट कर दिया है। हमने आरबीआई से भी इस बारे में बात की है।’