सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऋण खातों को फंसा हुआ कर्ज (एनपीए) के रूप में घोषित करने पर रोक हटाने के अपने 23 मार्च, 2021 के फैसले के स्पष्टीकरण और संशोधन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी। याचिकाकर्ता वकील विशाल तिवारी की ओर से इस मामले की सुनवाई टालने की गुहार लगाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को दिया था फैसला
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी। आवेदन में तिवारी ने किसी भी खाते को एनपीए घोषित करने की अवधि को फैसले की तारीख (23 मार्च) से गिने जाने के बारे में और स्पष्टीकरण की मांग की है।
दरअसल, पिछले वर्ष सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था कि जो खाते 31 अगस्त तक एनपीए नहीं थे, उन्हें एनपीए घोषित नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश महामारी के कारण कर्ज मोहलत के विस्तार, चक्रवृद्धि ब्याज की छूट जैसी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। शीर्ष अदालत ने 23 मार्च 2021 के फैसले के माध्यम से याचिकाओं का निपटारा करते हुए खातों को एनपीए घोषित करने पर पाबंदी हटा दी थी।