आगरा के कपड़ा उद्योग ने पिछले तीन वर्षों में चीन पर निर्भरता 40 फीसदी तक घटा दी है। कपड़े, रॉ मैटेरियल और यहां तक कि मशीनें भी स्वदेशी ही प्रयोग की जा रही हैं। इसी दम पर 400 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। इन तीन वर्षों में कारोबार 35 फीसदी बढ़ा है। अब उम्मीद है कि गारमेंट हब बनेगा तो कारोबार और तेजी से आगे बढ़ेगा।
आगरा रेडीमेड गारमेंट्स संगठन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने बताया कि चीन से रॉ मैटेरियल (बटन्स, आईलेड्स, जिपर आदि), फैब्रिक और मशीन का आयात होता था। यह बहुत कम रह गया है। चीन की जगह अब भीलवाड़ा, गुजरात, बंगलूरू, दिल्ली, कोलकाता, लुधियाना से सामान ले रहे हैं। तकनीक भी स्वदेशी इस्तेमाल कर रहे हैं। आगरा में सरकार द्वारा गारमेंट हब बनना प्रस्तावित है। उद्यमी मानते हैं कि इसके बनने से उद्योग ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। साथ ही निर्यात डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगा।
- आगरा में 250 रेडीमेड गारमेंट्स, होजरी की इकाइयां है।
- 50 करोड़ रुपये का निर्यात होता है।
- 20 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा।
उद्यमितों की मांगें हैं
- कम ब्याज दर पर उपलब्ध हो ऋण।
- शहर या आसपास ही रॉ मैटेरियल मिले।
- मशीनों की गुणवत्ता और बेहतर की जाए।
- सरकारी सब्सिडी छोटी इकाइयों को भी मिले।
- जमीन, बिजली पर सब्सिडी मिले।
स्वदेशी का मंत्र अपना लिया है
आगरा रेडीमेड गारमेंट्स संगठन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि हमने स्वदेशी का मंत्र अपना लिया है। चीन से कच्चे माल का आयात कम किया है। देश से ही सामान ले रहे हैं। कोशिश निर्यात बढ़ाने की है।
100 फीसदी आत्मनिर्भर होंगे
आगरा रेडीमेड गारमेंट ट्रेडर्स एंड मेन्युफेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके नैयर ने कहा कि अभी हम 100 फीसद आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन एक दिन होंगे जरूर। सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, दिल्ली आदि जगह से सामान आसानी से उपलब्ध हो पा रहा है। सरकार भी मदद कर रही है। आत्मनिर्भर होना एक मिशन है।
सरकारी मदद चाहिए
उद्यमी गौरव जैन ने कहा कि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी मदद की दरकार है। मसलन, गारमेंट हब में लैंड, बिजली आदि पर सब्सिडी मिले। साथ ही सुरक्षित माहौल भी आवश्यक है। आगरा में डिमांड बढ़ रही है, यह क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ रहा है।
तकनीक दिलाए सरकार
उद्यमी अनुराग अग्रवाल ने कहा कि हमारे पास क्षमता काफी है। बस अवसर देने की जरूरत है। मांग है कि रॉ मैटेरियल शहर या आसपास ही उपलब्ध हो। मशीनों में ज्यादा से ज्यादा उन्नत तकनीक इस्तेमाल हो। इसके लिए सरकार की मदद की जरूरत है। यहां प्रशिक्षण केंद्र बने।