अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने चेतावनी दी है कि सरकार पर कर्ज के बोझ के कारण उसकी रेटिंग में सुधार नहीं हो रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बृहस्पतिवार को पेश किए गए आम बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 3.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी किए जाने का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा है कि इसे तीन फीसदी पर रखने का लक्ष्य था, जो अब 2020-21 तक हासिल किया जाएगा। इससे पहले 2014 में भी सरकार ने तीन फीसदी के लक्ष्य के एक साल आगे खिसकाया था, जो अब और बढ़ता ही जा रहा है।
जीडीपी पर 68 फीसदी कर्ज
फिच रेटिंग्स के निदेशक थॉमस रूकमाकर के अनुसार भारत सरकार पर जीडीपी का 68 फीसदी कर्ज चढ़ा हुआ है। अगर राज्यों के राजकोषीय घाटे को शामिल कर लिया जाए तो समेकित घाटा 6.5 फीसदी हो जाएगा, जो अत्यंत उच्च स्तर है।
मालूम हो कि फिच ने पिछले साल मई में भारत की रेटिंग में कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे बीबीबी माइनस पर बरकरार रखा था। स्थिर आउटलुक के साथ यह निम्नतम निवेश ग्रेड की रेटिंग है।