खस्ता वित्तीय हालत के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी सूची में शामिल सार्वजनिक क्षेत्र के लगभग नौ बैंकों ने केंद्र सरकार को दो साल की सुधार योजना सौंपी है, जिसमें सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने तथा कॉरपोरेट लोन बुक में कटौती का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने आरबीआई की निगरानी सूची में शामिल 11 सरकारी बैंकों से अपनी वित्तीय हालत को मजबूत करने तथा आरबीआई के पूंजी पर्याप्तता मानदंड को पूरा करने के लिए एक योजना के साथ आने को कहा था।
एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से नौ बैंकों ने पहले ही वित्तीय सेवा विभाग को रिपोर्ट सौंप दी है। त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत 11 बैंकों में देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।
पीसीए के तहत, बैंकों के लाभांश के वितरण तथा मुनाफे के भुगतान पर रोक लगाई जाती है। बैंक के मालिकों को बैंक में और पूंजी डालने के लिए कहा जा सकता है। इसके अलावा, बैंकों के अपने शाखा नेटवर्क के विस्तार पर रोक लगाई जा सकती है तथा उच्च प्रोविजन बरकरार रखने की जरूरत पर जोर दिया जाता है। प्रबंधन पर होने वाले खर्च तथा निदेशकों के शुल्क पर भी एक सीमा लगाई जाती है।
इन बैंकों द्वारा पेश की गई सुधार योजना में कॉस्ट कटिंग, शाखाओं के आकार को कम करना, विदेशी शाखाओं को बंद करना, कॉरपोरेट लोन बुक में कटौती करने के साथ ही जोखिम वाली परिसंपत्तियों को अन्य बैंकों को बेचना शामिल है।