देश के 20 राज्य इस वक्त भंयकर सूखे और बाढ़ की चपेट में हैं। इससे जहां लोग वैसे ही परेशान हैं, वहीं खाने पीने के सामानों की कीमतें बढ़ने से इसने कोढ़ में खाज का काम किया है। देश की इकोनॉमी पर भी इस बाढ़ और सूखे से अरबों रुपये का नुकसान हुआ है।
पहाड़ों से लेकर के रेगिस्तान तक बारिश से सब्जियों की सप्लाई पर असर पड़ा है। सब्जियों के अलावा अन्य खाने पीने का सामान भी फैक्ट्रियों से एक से दूसरी जगह नहीं पहुंच पा रहा है, क्योंकि कई जगह बाढ़ के चलते सड़क व रेल यातायात बाधित हो गया है। रेल पटरियों के टूटने से भी ट्रेनों का चलना भी कई जगह पूरी तरह से ठप्प पड़ गया है।
दाल से भी महंगा हुआ टमाटर
पहाड़ों पर हुई बारिश ने टमाटर को सलाद की थाली से गायब करने के साथ रसोई का भी बजट बिगाड़ दिया है। आसमान छू रहे भाव से टमाटर आम आदमी की पहुंच से भी दूर है। टमाटर दाल से भी महंगा हो चला है। पिछले 15 दिनों से टमाटर के दाम लगातार उतार-चढ़ाव में है। वहीं, नींबू और हरी मिर्च भी तीखी हो गई है।
वेज और नॉनवेज दोनों प्रकार की सब्जी में टमाटर स्वाद बढ़ाने के साथ सलाद की साज-सज्जा का राजा है। दाल मखनी से लेकर आलू-सोयाबीन में टमाटर का तड़का जायका बढ़ाता है। पिछले 15 दिनों से टमाटर के दाम बेकाबू हैं। पहाड़ों पर बारिश ने महंगाई की आग में घी डाल दिया है।
अधिकांश टमाटर की पूर्ति नासिक और जम्मू क्षेत्र से होती है। रास्ते बंद और जीएसटी के इफेक्ट से टमाटर की सप्लाई बाधित पड़ी है। मांग बढ़ गई है, जबकि आपूर्ति कम होने से दाम बेपटरी हो गए हैं।
आढ़त से लेकर रेहड़ा-ठेला पर टमाटर के दाम कम नहीं हैं। शनिवार को टमाटर के दाम 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं, सोमवार को दाम में गिरावट के बाद भी 80-90 रुपये किलो तक टमाटर बिक रहा है। टमाटर के दाम दालों से भी ऊपर हैं। मसूर, अरहर, चना, मूंग आदि दालों से भी टमाटर महंगा हो गया है।
सब्जी मूल्य दाल मूल्य
टमाटर 80-90 मसूर 66
लौकी 40-45 साबूत मंसूर 42
तौरई 30-40 उड़द सफेद 82
अरबी 40 उड़द काली 75
नींबू 60 मूंग धुली 64
हरी मिर्च 60 मूंग छिलका 60
बैंगन 25 अरहर 64
करेला 25 चना दाल 70
खीरा 40 मटर दाल 70
(नोट: वस्तुओं के दाम प्रतिकिलो रुपये में हैं)