फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला वैज्ञानिक प्रयोग, 93 साल से बना है रहस्य

Fri, 13 Mar 2020 06:02 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला वैज्ञानिक प्रयोग - फोटो : Social media
आमतौर पर वैज्ञानिक कोई भी प्रयोग करते हैं तो वो चाहते हैं कि वह किसी निष्कर्ष पर पहुंच कर उसे जल्द से जल्द खत्म करें, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ऑस्ट्रेलिया में एक प्रयोग 93 साल से लगातार चल रहा है। यह दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला प्रयोग है, जिसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। 
विज्ञापन

2 of 6
वैज्ञानिक थॉमस पर्नेल - फोटो : Australian Institute of Physics
इस प्रयोग का नाम 'पिच ड्रॉप' है, जिसकी शुरुआत 1927 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में स्थित क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस पर्नेल ने की थी। थॉमस पर्नेल क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी में भौतिकी के पहले प्रोफेसर थे। एक सितंबर 1948 को उनकी मौत हो गई, लेकिन उनका प्रयोग अनवरत जारी है।  
विज्ञापन

3 of 6
'पिच ड्रॉप' प्रयोग - फोटो : Social media
इस प्रयोग के तहत तार पिच नाम के तरल पदार्थ को एक फ्लास्क में रखा गया है और उसकी बूंदें गिरने के लिए छोड़ दी गई हैं। दरअसल, 'पिच' एक अत्यधिक चिपचिपा तरल पदार्थ का नाम है जो ठोस दिखाई देता है, लेकिन असल में यह लिक्विड होता है। यह ठीक वैसे ही होता है जैसे कि कोलतार।

4 of 6
'पिच ड्रॉप' प्रयोग - फोटो : Social media
यह प्रयोग करने के पीछे शोधकर्ताओं का मकसद ये जानना था कि आखिर तार पिच की एक बूंद कितने समय में नीचे गिरती है। 1927 से अब तक यानी 93 साल में इसकी महज नौ बूंदें ही गिरी हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आज तक इसकी एक भी बूंद फ्लास्क से नीचे गिरते किसी ने नहीं देखी है। एक बार इस एतिहासिक लम्हे को कैद करने के लिए वेब कैमरा भी लगाया गया था, लेकिन आखिरी मौके पर कैमरा ही खराब हो गया था। 
विज्ञापन

5 of 6
'पिच ड्रॉप' प्रयोग - फोटो : Social media
दिसंबर 1938 में तार पिच की पहली बूंद फ्लास्क से नीचे गिरी थी। इसके बाद दूसरी बूंद फरवरी 1947 में (8.2 साल बाद), तीसरी बूंद अप्रैल 1954 (7.2 साल बाद), चौथी बूंद मई 1962 (8.1 साल बाद), पांचवीं बूंद अगस्त 1970 (8.3 साल बाद), छठी बूंद अप्रैल 1979 (8.7 साल बाद), सातवीं बूंद जुलाई 1988 (9.2 साल बाद), आठवीं बूंद नवंबर 2000 (12.3 साल बाद) और नौवीं बूंद अप्रैल 2014 (13.4 साल बाद) में गिरी थी। माना जा रहा है कि अभी फ्लास्क में इतनी तार पिच है कि इस प्रयोग को कम से कम 100 साल तक जारी रखा जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
'पिच ड्रॉप' प्रयोग - फोटो : Social media
क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के अलावा आयरलैंड के त्रिनिटी कॉलेज में भी इसी तरह का एक प्रयोग अक्तूबर 1944 में शुरू किया गया था, जो अब भी चल रहा है। इसके तार पिच के बारे में जानकारी है कि उसकी बूंद फ्लास्क से नीचे कब गिरी थी। 11 जुलाई 2013 को शाम पांच बजे के करीब तार पिच की बूंद फ्लास्क से नीचे गिरी थी, जिसे कैमरे में रिकॉर्ड किया गया था। यह पहली बार था, जब किसी तार पिच की बूंद को नीचे गिरते देखा गया था।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें