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रहस्यों से भरा है दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान, यहां हैं अजीबोगरीब झीलें

Fri, 06 Mar 2020 10:58 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान - फोटो : Social media
बोलिविया में सालर डि उयूनी दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान है। यह समुद्र तल से 3,656 मीटर ऊंचाई पर एंडीज पठार के 10,500 वर्ग किलोमीटर में फैला है। साथ ही यह बोलिविया का सबसे लोकप्रिय पर्यटन केंद्र है। दुनिया भर से पर्यटक यहां के विशाल सफेद मैदान को देखने आते हैं। सफेद मैदान के बीच ज्वालामुखीय चट्टानें छोटे द्वीपों की तरह दिखती हैं, मानो सफेद कैनवास पर काले बिंदु हों। इनमें सबसे मशहूर है क्वेशुआ में 'इंका का घर' या 'इंकाहाउसी'। इंका सभ्यता के लोग नमक के मैदान को पार करते समय अस्थायी रूप से यहां शरण लेते थे। 
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दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान - फोटो : Social media
40 मीटर तक ऊंची इन चट्टानों के आसपास प्रवाल जैसी दुर्लभ संरचनाएं और समुद्री सीपों के जीवाश्म दिखते हैं। ये प्रागैतिहासिक झील (मिनचिन झील) के आखिरी अवशेष हैं। वह विशाल झील 20 हजार से लेकर 40 हजार साल पहले तक सूख गई थी। इंकाहाउसी पर हजारों कैक्टस (ट्राइकोसेरस पासाकाना) धीरे-धीरे आसमान की ओर बढ़ते हैं। ये खूबसूरत पौधे साल में केवल एक या दो सेंटीमीटर बढ़ते हैं। इनकी ऊंचाई 10 मीटर और जीवन 300 साल तक का हो सकता है। 
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दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान - फोटो : Social media
नमक के मैदान लगभग पूरी तरह समतल हैं। किसी एक जगह से दूसरी जगह की ऊंचाई में एक मीटर से ज्यादा का अंतर नहीं है। बारिश होने पर या पास की झील से पानी का बहाव होने पर यह इलाका एक विशाल झील में तब्दील हो जाता है। इसी वजह से सालर डि उयूनी घूमने का सबसे सही समय बारिश के मौसम (दिसंबर से मार्च या अप्रैल तक) के ठीक बाद का है। इस दौरान नमक के मैदान के ऊपर पानी की पतली परत उसे एक विशाल आईने में बदल देती है, जिसमें बादल चलते हुए दिखते हैं। 

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दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान - फोटो : Social media
बोलिविया की नेशनल सर्विस ऑफ प्रोटेक्टेड एरियाज के विशेषज्ञों के मुताबिक, सालर डि उयूनी को आकार देने वाली भूमिगत शक्तियों ने दक्षिण-पश्चिमी बोलिविया को बहुत प्रभावित किया है। सालर डि उयूनी से 300 किलोमीटर से भी कम दूरी पर दक्षिण में एडुआर्डो एवारोआ नेशनल एंडियन वाइल्डलाइफ रिजर्व है। यहां कई भू-तापीय विशेषताएं दिखती हैं, जैसे सोल डि मनाना गीजर बेसिन। यह देश के सबसे विविधतापूर्ण भू-क्षेत्रों में से एक है। सोल डि मनाना गीजर की तरह है। कीचड़ से भरे गड्ढों में हमेशा बुलबुले उठते हैं जिनसे सल्फर गैस बाहर निकलती रहती है। सुबह होते ही यहां के गर्म पानी के प्राकृतिक झरनों को देखने के लिए गाड़ियों के काफिले आते हैं। यहां की सुबह बहुत ठंडी होती है। हवा और धरती के अंदर से निकलने वाली गैसों के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर होता है। यह भू-तापीय गतिविधि सबसे ज्यादा सुबह ही दिखती है। गर्म गैसों का विस्फोट 100 मीटर ऊपर तक जा सकता है। 
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लैगूना कोलोराडो, बोलीविया - फोटो : Social media
सोल डि मनाना से केवल 45 किलोमीटर दूर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर ही लगभग 4,300 मीटर की ऊंचाई पर लैगूना कोलोराडो (लाल झील) है। नमक की यह झील एक मीटर से भी कम गहरी है और यह अपने लाल रंग के पानी के लिए जानी जाती है। खनिजों से समृद्ध झील का यह रंग कई भूमिगत गर्म झरनों के कारण है जो झील का तापमान बढ़ाते रहते हैं। इस तापमान में डुनालिएला सैलीना शैवाल भी बढ़ते हैं। इस शैवाल का लाल पिगमेंट, जू प्लैंकटन (जीव-अवशेष) और फाइटोप्लैंकटन (पादप-अवशेष) के तलछट के साथ मिलकर खाड़ी के पानी को लाल रंग देते हैं। 
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लैगूना कोलोराडो में फ्लैमिंगो - फोटो : Social media
लैगूना कोलोराडो फ्लैमिंगों के लिए घोंसले बनाने की सही जगह है। इसके पानी में प्लैंकटन (अवशेष) की भारी मात्रा होती है। इसके चट्टानी और कीचड़ से सने किनारे से शिकारी दूर रहते हैं। फ्लैमिंगो की छह प्रजातियों में से तीन इस झील में पाई जा सकती है- एंडीस, चिली और जेम्स। वास्तव में जेम्स फ्लैमिगों को यहां 1957 में फिर से खोजा गया था। कई दशकों तक यह माना जाता रहा कि वे विलुप्त हो चुके हैं।  
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लैगूना कोलोराडो, बोलीविया - फोटो : Social media
लैगूना कोलोराडो को जो चीज सबसे खास और खूबसूरत बनाती है, वह है कि इसके कुदरती तत्वों और विविध रंगों का संतुलन। सफेद बोरेक्स के ढेर और हरे-पीले मॉस इसके लाल रंग के साथ मिलकर बहुरंगी दृश्य तैयार करते हैं। दुर्भाग्य से यह बहुरंगी वातावरण जल्द ही बदल सकता है। 2019 की शुरुआत में अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय ने लैगुना कोलोराडो से सिर्फ 40 किलोमीटर दूर एक भू-तापीय संयंत्र बनाने की परियोजना मंजूर की है। दिवंगत जीव वैज्ञानिक एलियाना फ्लोरेस इस परियोजना का तीखा विरोध करती थीं। उनका कहना था कि भूमिगत गर्म जल की निकासी यहां के भूजल परतों का संतुलन बिगाड़ देगी। 2012 में उन्होंने बोलिविया के अखबार 'ला रेजोन' में लिखा था, 'भू-तापीय परियोजना का निर्माण जारी रखना जेम्स फ्लैमिंगो के विलुप्त होने और यहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश का प्रतिनिधित्व करता है'।  
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लैगूना वेर्डे (हरी लैगून), बोलीविया - फोटो : Social media
लैगूना कोलोराडो यहां की एकमात्र रंगीन झील नहीं है। एडुआर्डो एवरो नेशनल एडियन वाइल्डलाइफ रिजर्व के दक्षिण-पश्चिमी कोने के पास लैगूना वेर्डे (हरी लैगून) और लैगूना ब्लांका (सफेद लैगून) हैं। ये एक-दूसरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं। आर्सेनिक और तांबे की भारी मात्रा के कारण लैगूना वेर्डे का रंग पुदीने जैसा है। लैगूना ब्लांका का दूधिया रंग उसके नीचे बोरेक्स के कारण है। टूर गाइल माउरो बेर्ना कहते हैं, 'कभी-कभी यहां भूगर्भीय हलचल होती है और हम लैगून के असली रंगों को नहीं देख पाते।' हालांकि पानी के रंग के पर दूसरे सिद्धांत भी लागू होते हैं जो तापमान, दिन के समय और हवा पर निर्भर करते हैं। शायद यह बर्फीली सुबह के तापमान के कारण हो या पानी की सतह के नीचे बहने वाले बोरेक्स कणों के कारण, लेकिन उस जगह और उस वक्त वहां होना ऐसा लगता है जैसे किसी निर्जन ग्रह पर घूम रहे हों।
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