मिकांग नदी के किनारे बसे अंकोरवाट मंदिर को टाइम्स ने दुनिया की पांच आश्चर्यजनक स्थलों में शामिल किया था। साथ ही, विश्व के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थानों में से एक होने के साथ ही 1992 में यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत में भी शामिल किया।
इस मंदिर की सबसे खूबसूरत खासियत ये है की इस मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत की कहानियां लिखी हुई हैं साथ ही असुरों और देवताओं के अमृत मंथन का भी उल्लेख है।
ऐसा लगता है की विभिन्न आकृतियों वाले सरोवरों के खंडहर आज भी निर्माणकर्ता की प्रशंसा कर रहे हों। मंदिर नगर के ठीक बीचोबीच शिव का एक विशाल मंदिर है जिसके तीन भाग हैं। प्रत्येक भाग में एक ऊंचा शिखर है। इस ऊंचे शिखरों के चारों ओर अनेक छोटे-छोटे शिखर बने हैं जिनकी संख्या लगभग 50 के आसपास हैं। मंदिर की विशालता और निर्माण कला आश्चर्यजनक है उसकी जितनी तारीफ की जाये कम है।
खमेर शास्त्रीय शैली से प्रभावित इस मंदिर का निर्माण सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया लेकिन वे इसे पूरा नहीं कर सके और इसका निर्माण धरणीन्द्रवर्मन के शासन काल में पूरा हो सका।
स्टेप पिरामिडों की तरह यह सीढ़ी पर उठता गया है। इसका प्रमुख शिखर लगभग 64 मीटर है और बाकि आठों शिखर 54 मीटर ऊंचे हैं। मंदिर साढ़े तीन किलोमीटर लम्बी पत्थर की दिवार से घिरा हुआ है, उसके बाहर 30 मीटर खुली भूमि और फिर बाहर 190 मीटर चौडी खाई है।आज के समय में अंगकोर वाट दक्षिण एशिया के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों में से एक माना जाता है।
Input: भारत कोष