मुंबई की लोकल ट्रेनें हमेशा भीड़ से भरी रहती हैं। जनरल कोच तो पहले से ही खचाखच होते हैं, लेकिन अब महिलाओं के लिए बने लेडीज कोच में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। भीड़ इतनी होती है कि न बैठने की जगह मिलती है और न ही ठीक से खड़े होने की। खासकर सुबह-शाम के पीक ऑवर्स में महिलाएं एक-दूसरे को धक्का देती हुई किसी तरह ट्रेन में घुसने की कोशिश करती हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी वीडियो के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस भीड़भाड़ में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो केवल अपने आराम की सोचती हैं। वे ट्रेन को जैसे अपना निजी कमरा समझ लेती हैं और सीधे फर्श पर चटाई या प्लास्टिक शीट बिछाकर बैठ जाती हैं। इससे न सिर्फ खड़े होने वालों को दिक्कत होती है, बल्कि आने-जाने का रास्ता भी पूरी तरह से बंद हो जाता है। इन्हीं वजहों से परेशान एक यात्री ने रेडिट पर अपनी शिकायत साझा की है। उन्होंने मुंबई लोकल के एक कोच की तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें कई महिलाएं नीचे बैठी दिख रही हैं। इनमें से एक महिला तो ट्रेन के भीतर ही मेकअप कर रही है।
https://www.reddit.com/r/mumbai/comments/1mhvvgw/where_can_i_complain_about_this/
लोकल ट्रेन के फर्श पर बैठी दिखीं लड़कियां
यह तस्वीर रेडिट के @r/Mumbai ग्रुप में डाली गई है और तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने लिखा कि यह रोजाना सुबह 6 बजे की घटना है। उन्होंने बताया कि जब उन महिलाओं से खड़े होने को कहा जाता है, तो वे कह देती हैं, "मैं खड़ी नहीं हो सकती," और फिर बेधड़क मेकअप करने लगती हैं। पोस्ट में यह भी साफ किया गया कि यह कोई एक दिन की बात नहीं है, बल्कि हर दिन ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। तस्वीर में भले ही तीन महिलाएं नजर आ रही हों, लेकिन असल में वहां रोज पांच से छह महिलाएं ट्रेन के फर्श पर बैठती हैं। उनमें से कुछ तो ट्रेन के दरवाजे तक को घेर लेती हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने और उतरने में भारी परेशानी होती है।
पोस्ट पर यूजर्स ने किए ढेरों कमेंट्स
यूजर ने अंत में पूछा, "मैं इसकी शिकायत कहां कर सकता हूं? ये हर दिन की समस्या बन चुकी है और मुझे बहुत गुस्सा आता है।" इस पोस्ट पर ढेरों लोगों ने कमेंट किए। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, "अगर ये आंटियां खड़ी नहीं हो सकतीं, तो क्या वो रेंगकर ट्रेन में आईं?" वहीं एक दूसरे यूजर ने कहा, "ऐसे मामलों में बाकी यात्रियों को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए, तभी सुधार संभव है।"