जरा सोचिए आप दिन भर काम करें और उस काम बदले आपको तनख्वाह नहीं बल्कि बीयर पीने को मिले तो आप क्या कहेंगे? जाहिर है इस बात पर सबके अलग-अलग मत होंगे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रचीन मिश्र में लोगों को तनख्वाह के रूप में बीयर पीने को मिलती थी।
आपके आश्चर्य को ये बात और जोर देगी कि प्राचीन गीजा पिरामिड बनाने वाले मजदूरों ने पगार में बीयर पीकर अजूबे पिरामिड खड़े कर दिए। ये दावा दरअसल हम नहीं कर रहे हैं, इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों और अंग्रेजी साइट सिक्सफिफ्टीएमएल के मुताबिक मिश्र में बीयर को ही पगार के रूप में दिया जाता था।
बीयर को अन्य नामों से पुकारा जाता था। इनमें 'हेकेट' और 'तेनेमू' नाम मुख्य थे। मजदूरों को दिन में तीन बार बीयर दी जाती थी। बताया जाता है कि मिश्र में बड़े-बूढ़ों के अलावा बच्चे भी इसे बड़े चाव से पीते थे। उनको मिलने वाली बीयर आज की पारंपरिक बीयर से अलग होती थी। वो तीखी और कड़वी नहीं होती थी। बीयर का टेस्ट मीठा होता था। ये भी कहा जाता है कि बीयर नशीला पदार्थ नहीं, बल्कि पोषण के लिए अच्छी मानी जाती थी। उस समय के त्योहारों और उत्सवों पर जमकर बीयर का सेवन किया जाता था। लोग देवी-देवताओं के चढ़ावे के तौर पर भी बीयर चढ़ाते थे। आज से करीब 2200 ईसा पूर्व की ये तस्वीर आज भी हैरान करती है।