13 साल के बेटे की मौत पर बिलख रहा था परिवार
- फोटो : ANI
डेंगू से जूझ रहे 13 साल के बेटे ने अस्पताल की बिस्तर पर लेटे-लेटे दुनिया को अलविदा कह दिया। पीछे रह गए रोते-बिलखते मां-बाप और एक भाई। शाम ढल चुकी थी, लिहाजा अंतिम संस्कार मुमकिन न था। मां-बाप बेटे के शव को घर लेकर आए। जैसे ही वे दरवाजे पर पहुंचे मकान मालिक आ धमका...
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मालिक ने नहीं दी घर में एंट्री
मालिक ने नहीं दी घर में एंट्री
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मकान मालिक ने परिवार को घर के अंदर नहीं आने दिया। उसने कहा कि तीन महीने पहले ही उसकी बेटी की शादी हुई है। अगर कोई लाश घर के अंदर आएगी तो अशुभ होगा। इस अंधविश्वासी मकान मालिक ने तो उन्हें कम्पाउंड से भी बाहर कर दिया। एक तो हाथ में बेटे की लाश, दूसरी ओर लोगों की बेरुखी और इन सबके बीच रही सही कसर बारिश पूरी कर रहा था। उस पल बारिश में एक परिवार नहीं, मानवीय संवेदना भीग रही थी। बीमारी ने बेटे की जान ली, लेकिन बीमार सोच ने इंसानियत का गला घोंट डाला।
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मदद को आगे आए पड़ोसी
मदद को आगे आए पड़ोसी
तसल्ली इस बात की रही कि आस-पड़ोस के लोगों को मुसीबत में पड़े इस परिवार पर दया आ गई। उन्होंने शव को रातभर बारिश से बचाने के लिए ताबूत का बंदोबस्त किया और उसे तिरपाल से ढक दिया। इसी के सहारे परिवार ने रात बिताई। सुबह 8 बजते ही बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हैदराबाद में घटी इस घटना में मकान मालिक के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।