सुधा चंद्रन एक ऐसी महिला हैं जिनके बारे में जितना कहें, उतना कम। एशिया के सबसे गुणी भरतनाट्यम कलाकारों में से एक सुधा चंद्रन हम सभी के लिए मिसाल हैं।
साल 1981 में हुए एक एक्सीडेंट में उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया। बाद में गैंगरीन हो जाने की वजह से डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा। डॉक्टरों ने कहा कि सुधा को अपने डांसिंग करियर को भूलना होगा।
लेकिन सुधा ने हार नहीं मानी। एक ही पैर के साथ फिर खड़ी हुई और जयपुरिया फुट लगाने के बाद दो सालों बाद फिर ट्रेनिंग शुरू की। इसके बाद तो जो उन्होंने वापसी की वो ऐसी थी कि आज भी पूरी दुनिया में जगह-जगह अपने डांस के जौहर बिखेरती हैं।
बता दें कि सुधा एक नामी टीवी और फिल्म एक्टर भी हैं।
(सोर्स-ऑडी और टॉपीएप्स से।)
पेट्रिक हेनरी हुग्स
पेट्रिक हेनरी हुग्स। पेट्रिक जन्म से नेत्रहीन हैं। यही नहीं वो बाइलैटरल एनोपथैलमिया और हिप डिस्प्लासिया बीमारी से पीड़ित हैं। वो खुद से चल-फिर सकने में असमर्थ हैं।
उनकी रीढ़ में दो स्टील की रॉड लगाई गई हैं ताकि वो बैठ सकें। कहा जा सकता है कि वो एक ऐसे शरीर के साथ जन्मे जिससे वो कुछ भी नहीं कर पाते थे।
लेकिन पेट्रिक के पिता ने पेट्रिक को किसी से कमतर नहीं समझा और उन्हें नौ महीने से ही पियानो पर बिठाकर उसे सीखने की ट्रेनिंग देने लगे।
पेट्रिक मीडिया की नजरों में साल 2006 में आए जब उन्हें दुनिया ने यूनिवर्सिटी ऑफ लुईसविले के एक छात्र के रूप में लुईसविले मार्चिंग बैंड का हिस्सा बने देखा। वो व्हीलचेयर पर बैठकर ट्रंपेट बजा रहे थे।
आपको जानकर हैरत होगी कि नेत्रहीन और खुद से हिल-डुल ना सकने वाले पैट्रिक एक पियानिस्ट हैं, ट्रंपेट भी बजाते हैं और गाना भी गाते हैं। उनके नाम दुनियाभर के कई अवॉर्डस हैं। रोज ही वो लाखों को अपने सफर से प्रेरित करते हैं।
लिज मुरे
ये हैं लिज मुरे। एक ऐसी महिला जिन्होंने बताया कि कैसे जिंदगी को बदलना इंसान के ही बस में होता है। लिज एचआईवी पीड़ित मां-बाप की बेटी हैं। उनका जन्म 30 सितंबर 1980 में न्यूयॉर्क के एक काफी गरीब परिवार में हुआ।
लिज के पैदा होने के कुछ दिनों बाद ही उनकी मां एड्स की वजह से गुजर गई। उनके पिता भी उन्हें छोड़कर चले गए। न्यूयॉर्क की सड़कों पर कभी पार्कों में तो कभी स्टेशनों पर रहते हुए वो बड़ी हुई।
लेकिन खुद को गलत संगत में डालने या गलत राह पर जाने के बजाय उन्होंने किसी तरह अपनी पढ़ाई की और हावर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। वहां पढ़ने के बाद वो ना सिर्फ एक नामी कंपनी की डायरेक्टर बनी बल्कि दुनिया भर में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी मशहूर हैं।
रैंडी पॉश
रैंडी पॉश। रैंडी कारनेजी मेलन युनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर थे। 2006 के सितंबर महीने में पैंक्रियास के कैंसर का उन्हें पता चला। दो सालों तक इलाज करवाने के बाद साल 2008 में उनकी मृत्यु हो गई।
लेकिन जिस चीज ने उन्हें दुनियाभर में मशहूर किया और उनकी गिनती कभी ना भूले जा सकने वाले लोगों में करवाई, उसकी वजह बना एक यूट्यूब वीडियो।
इस वीडियो का नाम है 'रियली अचीविंग यॉर चाइल्डहुड ड्रीम्स'। ये एक लेक्चर है जो उन्होंने सीएमयू ऑडिटोरियम में दिया। जिंदगी को लेकर बेहद सकारात्मक होने और साफ नजरिए को दिखाता ये वीडियो बताता है कि कैसे एक जानलेवा बीमारी के होने के बावजूद रैंडी जिंदगी को लेकर सकारात्मक थे।
उनके इस वीडियो को अब तक करोड़ों बार देखा गया है। बाद में इस वीडियो को किताब की भी रूप दिया जिसे 35 अलग-अलग भाषाओं में रूपांतरित भी किया गया है।
सीन स्वानर
सीन स्वानर। कैंसर को मात देने वाला कोई भी व्यक्ति हो, वो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन ही जाता है। कुछ ऐसा ही मामला है सीन स्वानर का। सीन एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एक नहीं बल्कि कैंसर के दो खतरनाक स्टेज को मात दिया।
वो हॉजस्किन बीमारी और आस्किन सारकोमा से पीड़ित थे। फिर भी 13 और 15 साल की उम्र में ही उन्होंने कैंसर के दो जानलेवा स्टेजों को मात दे दिया।
इसके बाद वो विश्व के पहले ऐसे व्यक्ति बने जो कैंसर के बाद भी माउंट ऐवरेस्ट पर चढ़े और सफलतापूर्वक लौटे भी। अपने इस सफर से वो आज भी कई कैंसर पीड़ितों के लिए उम्मीद की रोशनी हैं।
जेसिका कॉक्स
जानिए जेसिका कॉक्स की कहानी। पहली ऐसी पायलट जो हाथों से नहीं बल्कि पैरों से विमान को उड़ाती हैं। जी हां, जेसिका के जन्म से ही हाथ नहीं थे। लेकिन इस रुकावट को उन्होंने कभी रोड़ा बनने नहीं दिया। बल्कि अपनी जिंदगी को वो रूप दिया जैसे कोई सोच भी नहीं सकता।
जेसिका साइकोलॉजी में ग्रैजुएट हैं, ताइक्वॉन्डो में डबल ब्लैक बेल्ट, काफी तेज रफ्तार की ड्राइवर और पैरों से पच्चीस शब्द पर मिनट की रफ्तार से टाइप करने वाली महिला भी।
यही नहीं बिना हाथों के ही वो आंखों में कॉन्टैक्ट लेंस भी डाल लेती हैं। वो एक मोटिवेशनल स्वीकर भी हैं और अपनी जिंदगी के बारे में बात करते हुए वो कई लोगों को पल-पल प्रेरित करती हैं।
हेलेन कीलर
हेलेन कीलर के बारे में तो आप जानते ही होंगे। उनकी जिंदगी पर 'द मिरिकल वर्कर' नाम की मूवी भी बनी है। उनकी कहानी सालों पुरानी है पर आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।
नेत्रहीन और सुन न सकने की असमर्थता के बाद भी उन्होंने आर्टस् में डिग्री ली और आगे चलकर सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका की मेंबर बनी। उन्होंने बारह किताबें भी लिखीं हैं और उनके नाम प्रजिडेशियल मेडल ऑफ फ्रीडम की भी विजेता रही।
साथ ही उन्होंने अमेरिकन फाउंडेशन फॉर ब्लाइंड के नाम अपनी जिंदगी कर दी।
निज वुजुकिक
निज वुजुकिक काफी मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर हैं। वो टेट्रा अमेलिया सिंड्रोम से पीड़ित हैं। एक ऐसी बीमारी जिसमें जन्म से ही हाथ और पैर दोनों ही नहीं होते।
निज 1982, दिसंबर के महीने में जन्मे थे। वो ऑस्ट्रेलिया से हैं। हाथ-पैर ना होने के वजह से उन्होंने बड़ी कठिनाइयों से अपना बचपन काटा। शारीरिक दिक्कतों के साथ ही लोग उन्हें चिढ़ा-चिढ़ाकर परेशान कर देते थे।
बावजूद इसके 17 साल की उम्र में ही उन्होंने अपना एक एनजीओ बनाया। इसका नाम रखा 'लाइफ विदआउट लिंब्स'।
आज की तारीख में वो एक ऐसे मोटिवेशनल स्पीकर हैं जो जीवन, आशा और अक्षमता को मात देने पर लोगों से काफी बातें करते हैं और उन्हें जिंदगी का रवैया हमेशा सकारात्मक रखने की बात करते हैं।
स्टीफन हॉकिंस
स्टीफन हॉकिंस की भी कहानी ऐसी है जिसे जानकर अच्छे-अच्छे अवाक रह जाएं। वो एक ऐसे व्यक्ति हैं जो जन्म से ही मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी से पीड़ित हैं। पूरे बदन में उनके पास अगर कुछ काम करता हुआ अंग है तो वो है उनका सिर।
एक विशेष तरह के व्हील चेयर और अपने सामने कंप्यूटर सिस्टम को रखकर उन्होंने वो-वो काम किए है जिसके लिए साइंस की दुनिया उन्हें हमेशा याद रखे।
ग्रैविटेशनल सिंगुलैरिटीज और अन्य कई थ्योरियों पर उम्दा काम करने और उन्हें गढ़ने के लिए बड़े-बड़े टेक पंडित भी स्टीफन को मानते हैं।
बेन अंडरवुड
मिलिए बेन अंडरवुड से। बेन के लिए कहा जाता है कि वो अपने कानों से देखते हैं। बेन कैलिफोर्निया में रहते हैं और नेत्रहीन हैं।
लेकिन नेत्रहीन होने के बाद भी उन्होंने इकोलोकेशन पर महारथ पर हासिल की।
एक ऐसा नेविगेशन टेकनीक जिसे पानी के अंदर डॉल्फिन और पक्षी दिशाओं को समझने के लिए इस्तेमाल में लाते।