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अमेरिका में अश्वेतों के साथ हुआ सबसे भीषण नरसंहार, मारे गए थे 300 लोग

Mon, 22 Jun 2020 03:47 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमेरिका का सबसे भीषण नरसंहार - फोटो : Social media/Oklahoma Policy Institute
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यह अमेरिका में काले लोगों के खिलाफ हुए कुछ सबसे बुरे नरसंहारों में से एक है, लेकिन इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। अमेरिका में पुलिस की बर्बरता के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच ओक्लाहामा के टुल्सा में इन दिनों शहर के इतिहास के सबसे बुरे दौर को याद किया जा रहा है। यह 1921 की बात है। इस दौरान शहर में ब्लैक वॉल स्ट्रीट के नाम से मशहूर एक फल-फूल रही काले लोगों की आबादी में मौत और तबाही का मंजर नजर आया था। 

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विडंबना यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के मध्य-पश्चिम में स्थित इसी शहर से तीन नवंबर से शुरू हुए राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना कैंपेन फिर से शुरू किया। यहां वे 20 जून को अपने समर्थकों के बीच पहुंचे। ऐसे में कई लोगों को इस बात पर हैरानी हुई कि देशभर में चल रहे नस्लीय तनाव के बीच अपना चुनाव प्रचार फिर से शुरू करने के लिए क्या यह वाकई एक उचित जगह है।  

कैसे हुआ यह नरसंहार

यह सब उस अफवाह के साथ शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि एक काले युवा ने डाउनटाउन टुल्सा होटल में एक गोरी लड़की पर हमला कर दिया है। यह घटना 30 मई 1921 की है। उस दिन डिक रोलैंड की मुलाकात सारा पेज नामक महिला से एक एलीवेटर पर हुई थी। इसके बाद क्या हुआ इसका ब्योरा हर शख्स के हिसाब से अलग-अलग है। इस घटना के बारे में खबरें गोरे समुदाय के बीच पहुंचने लगीं। ये सूचनाएं बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही थीं। टुल्सा पुलिस ने रोलैंड को अगले दिन अरेस्ट कर लिया था और जांच शुरू कर दी थी। 
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31 मई को टुल्सा ट्रिब्यून न्यूजपेपर में छपी एक भड़काऊ खबर में कालों और गोरों को अदालत के पास आपस में झड़प के लिए उकसाया गया था। यहां पर शेरिफ और उनके लोगों ने टॉप फ्लोर को बंद कर दिया था ताकि रोलैंड को संभावित लिंचिंग से बचाया जा सके। इस दौरान गोलियां चलीं और अल्पसंख्यक अफ्रीकी अमेरिकी ग्रीनवुड जिले की ओर विस्थापित होने लगे। यह जगह ब्लैक वॉल स्ट्रीट के तौर पर जानी जाती है जो कि कारोबारी और आर्थिक समृद्धि के लिए मशहूर थी। 

एक जून की सुबह गोरे दंगाइयों ने ग्रीनवुड को लूटा और जलाया। इसके बाद ओक्लाहामा के तत्कालीन गवर्नर जेम्स रॉबर्ट्सन ने मार्शल लॉ का एलान कर दिया। दंगों के दौरान 35 ब्लॉक खाक कर दिए गए। इसका मतलब है कि 1,200 से ज्यादा घरों को तबाह कर दिया गया था। 800 से ज्यादा लोगों का चोटों के लिए इलाज किया गया। शुरुआत में कहा गया था कि 39 लोग मारे गए हैं, लेकिन इतिहासकार बताते हैं कि कम से कम 300 लोग मारे गए थे। 6,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से ज्यादातर अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के लोग थे। 

ब्लैक वॉल स्ट्रीट

1900 के दशक की शुरुआत में ग्रीनवुड जिला एक उभरता हुआ शहर था। यहां मूवी थियेटर, रेस्टोरेंट्स, दुकानें और फोटोग्राफी स्टूडियो थे। ब्लैक वॉल स्ट्रीट नाम इसके आर्थिक उभार को दिखाता है। यह देश में काले समुदाय के लिए सबसे बेहतर शहर माना गया था। लेकिन दंगों, आगजनी और हिंसा ने इस शहर को बर्बाद कर दिया था। 

पिछले तनाव

टुल्सा का नस्लीय नरसंहार एक अलग-थलग और अनपेक्षित घटना के तौर पर नहीं हुआ था। इस पूरे मामले को समझने के लिए दो साल पहले जाना पड़ेगा। उस वक्त अमेरिकी सेना पहले विश्व युद्ध से वापस लौटी थी। उस वक्त कई काले सैनिकों की उनकी सैन्य वर्दियों में ही लिंचिंग कर दी गई थी।

1919 की गर्मियों में अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ लिंचिंग और दूसरे अपराधों की बाढ़ आ गई। ओक्लाहामा विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर बेन केपल कहते हैं, 'टुल्सा नरसंहार को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।' वह कहते हैं, 'इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि यह शहर एक समृद्ध आर्थिक केंद्र था, जिसकी वजह से दूसरों को ईर्ष्या हो रही थी।'

केपल कहते हैं कि नस्लीय भेदभाव के वक्त पर वॉल स्ट्रीट की मौजूदगी गोरे श्रेष्ठतावादियों को खल रही थी। इसकी वजह से उन्हें लगा कि इसे जला दिया जाना चाहिए। वह कहते हैं, 'युद्ध के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था गहरी मंदी में चली गई थी। इसकी वजह से ऑयल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ा था।'  

एक छिपी हुई त्रासदी

केपल ने ओक्लाहामा यूनिवर्सिटी आने तक टुल्सा नस्लीय नरसंहार के बारे में नहीं सुना था। यह 1994 की बात है। उन्होंने स्कूल या यूनिवर्सिटी तक में इस घटना के बारे में नहीं सुना था। ग्रीनवुड कल्चरल सेंटर में प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर मिशेल ब्राउन इन यादों को बनाए रखने की कोशिश करती हैं। साथ ही वे अभी भी जिंदा बने हुए कुछ लोगों के अनुभवों को याद करती हैं। 

ब्राउन ने बताया, 'नरसंहार के बाद काले और गोरे दोनों ने इस घटना को छिपाने की कोशिश की थी।' करीब 300 लोगों को कब्रों में दफन किया गया था और उनके शव कभी नहीं मिल पाए।
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किसी को मिली सजा?

1990 के दशक में कानूनी कार्यवाही के जरिए जीवित बचे पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें कुछ हो नहीं पाया। टुल्सा अधिकारियों ने पिछले साल एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया। इसके तहत अंडरग्राउंड पेनीट्रेशन राडार के जरिए कब्रों का पता लगाने की कोशिश की गई ताकि पीड़ितों की पहचान की जा सके। ब्राउन के मुताबिक, 'हमें एक समुदाय के तौर पर इसकी चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि शहर एक बुरे दौर से गुजर रहा है। शहर बंटा हुआ है, क्योंकि हमने इतिहास के इस हिस्से को हल करने की कोशिश नहीं की।' 

चीजें दुरुस्त होना मुश्किल

चीजें ठीक करना एक कठिन काम है। ट्रेन ट्रैक अभी भी ग्रीनवुड को बाकी के शहर से अलग रखे हैं। कुछ एतिहासिक बिंदुओं के इतर टुल्सा में ब्लैक वॉल स्ट्रीट का कोई साक्ष्य नहीं है। थेरेसी अडुनी कहते हैं, 'मेरा परिवार यहां 1921 में रहता था। अब यहां कुछ भी नहीं है।' 

उनके दादा घड़ियां बनाते थे, उनके पिता नरसंहार के कुछ महीनों बाद पैदा हुए थे। अडुनी बताते हैं, 'उन्होंने अब नरसंहार शब्द को स्वीकार कर लिया था। कई साल तक वे इसे दंगा बताते रहे। ऐसे में जिन लोगों का सबकुछ लुट गया था, उन्हें बीमा कंपनियों ने कोई डैमेज नहीं दिया।' 

गंभीर बहस

केपल अब इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि बड़ी संख्या में डॉक्युमेंट्री, किताबों और रिपोर्ट्स के जरिए 100 साल बाद टुल्सा के बारे में बताया जा रहा है। केपल कहते हैं, 'हम एक ऐसी बहस में डूबे हैं, जिसमें जब आप यह मान लेते हैं कि यह घटना हुई थी और यह एक गंभीर चीज थी तो यह सवाल उठता है कि हम क्या करते हैं, हमारे सार्वजनिक संस्थानों पर इसका क्या असर हुआ है।' 

केपल बताते हैं, 'अमेरिका में जो अभी हो रहा है उसकी बुनियाद पहले से रखी जा रही थी। गुजरे 10 साल में पुलिस ने पूरे देश में दुर्व्यवहार किया है और लोग इससे दुखी हैं।'  
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