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सिर्फ दिल्ली नहीं पाकिस्तान में भी है लाल किला, बनने में लगे थे 87 साल

Thu, 05 Mar 2020 04:29 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाकिस्तान का लाल किला - फोटो : Social media
दिल्ली में स्थित लाल किले को भारत की एतिहासिक विरासतों में से एक माना जाता है। इस किले को पांचवे मुगल शासक शाहजहां ने बनवाया था। इस एतिहासिक किले को वर्ष 2007 में यूनेस्को द्वारा एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में चयनित किया गया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के अलावा पाकिस्तान में भी एक लाल किला है, जिसे बनने में 87 साल का लंबा वक्त लगा था। 
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पाकिस्तान का लाल किला - फोटो : Social media
पाकिस्तान का यह लाल किला इस्लामाबाद से तीन घंटे की दूरी पर स्थित मुजफ्फराबाद में है। इसे मुजफ्फराबाद फोर्ट और रुट्टा किला के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, चक शासकों ने मुगलों से बचने के लिए इस किले का निर्माण शुरू कराया था। 
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पाकिस्तान का लाल किला - फोटो : Social media
इस किले को बनाने का काम वर्ष 1559 में शुरू हुआ था, लेकिन 1587 में मुगलों ने यहां कब्जा कर लिया, जिसके बाद किले को बनाने का काम कछुए की गति से चलने लगा। आखिरकार यह किला जैसे-तैसे साल 1646 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। उस समय यहां बोम्बा रियासत के सुल्तान मजफ्फर खान का शासन था, जिन्होंने मुजफ्फराबाद को बसाया था। 

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पाकिस्तान का लाल किला - फोटो : Social media
साल 1846 में इस किले को फिर से बनाया गया। उस समय यहां डोगरा वंश के महाराजा गुलाब सिंह का राज था। डोगरा वंश की सेना ने साल 1926 तक इस किले का इस्तेमाल किया। उसके बाद वो इसे छोड़ कर चले गए, जिसके बाद किला वीरान हो गया। 
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पाकिस्तान का लाल किला - फोटो : Social media
यह किला तीन तरफ से नीलम नदी से घिरा है। पाकिस्तान ने इसकी काफी अनदेखी की, जिसकी वजह से यह किला वीरान तो रहा ही, साथ ही साथ यह खंडहर के रूप में तब्दील हो गया। अब यह किला किसी खंडहर की तरह ही दिखता है। 
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