अफ्रीका की वोडाबे जनजाति अपने अनोखे रिश्तों और रंग-बिरंगे त्योहारों के लिए जानी जाती है। इस समाज की खासियत यह है कि यहां रिश्तों की शुरुआत महिलाओं के चुनाव से होती है। हर साल एक बार एक बड़ा उत्सव मनाया जाता है, जिसे गेरवोल फेस्टिवल कहते हैं। यह त्योहार सिर्फ नाच-गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम और आकर्षण का उत्सव माना जाता है। तो आइए इस त्योहार के बारे में विस्तार से जानते हैं।
त्योहार में मर्द बनते हैं औरत
गेरवोल में पुरुष अपनी सुंदरता दिखाने के लिए घंटों सजते-संवरते हैं। वे रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं, चेहरे पर लाल और सफेद पेंट लगाते हैं, होंठों को काला रंगते हैं और घंटों तक तैयार होते रहते हैं। अक्सर एक पुरुष को तैयार होने में 6 घंटे से भी ज्यादा वक्त लग जाता है। उनकी सुंदरता का पैमाना भी अलग होता है, लंबा और दुबला शरीर, चमकदार सफेद आंखें और दांत, पतले होंठ, हल्की त्वचा और लंबा जबड़ा। इतना ही नहीं अगर कोई पुरुष मुस्कुराते हुए आंखें घुमा सके तो वह महिलाओं के बीच सुपरस्टार जैसा बन जाता है।
महिलाएं करती हैं विनर का फैसला
इस त्योहार का सबसे खास हिस्सा है याके डांस। इसमें पुरुष लंबी कतार में खड़े होकर गाते और नाचते हैं। उनकी हरकतों और भाव-भंगिमाओं को महिलाएं ध्यान से देखती हैं। बुजुर्ग पुरुष तीन महिलाओं को चुनते हैं, जो वहां मौजूद सबसे आकर्षक पुरुष को विजेता घोषित करती हैं। यह किसी सुंदरता प्रतियोगिता जैसा होता है, लेकिन यहां मंच महिलाओं के लिए सजाया जाता है और पुरुष खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं।
महिलाएं शादीशुदा होते हुए भी कर सकती हैं पुरुषों को पसंद
वोडाबे समाज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां रिश्तों को लेकर बेहद खुलापन है। महिलाएं शादीशुदा होते हुए भी किसी और पुरुष को पसंद कर सकती हैं। कुछ महिलाएं अपने पहले पति को छोड़ देती हैं, जबकि कुछ दोनों पतियों के साथ रहना पसंद करती हैं। जब तक महिलाओं को सही साथी नहीं मिलता, तब तक वे अलग-अलग पुरुषों के साथ संबंध बना सकती हैं। यहां बहुपति और बहुपत्नी दोनों को ही मान्यता मिली हुई है।
हैरान कर देगी यहां की संस्कृति
अगर कोई पुरुष संतान पैदा करने में सक्षम नहीं होता तो वह खुद अपनी पत्नी को किसी और पुरुष से संबंध बनाने की अनुमति देता है। इसके अलावा, सुंदर बच्चों के लिए भी पत्नियां हैंडसम पुरुषों से संबंध बना सकती हैं। यहां संतान को शक्ति, दौलत और पुरुषत्व का प्रतीक माना जाता है। वोडाबे जनजाति का जीवन भी अपने आप में अनोखा है। उनके पास बहुत सारे मवेशी होते हैं, जिन्हें वे परिवार का हिस्सा मानते हैं और बड़े ध्यान से रखते हैं। खाने-पीने में वे ज्यादातर शाकाहारी होते हैं। आज भी वोडाबे जनजाति बाहरी दुनिया से काफी हद तक अछूती है। बहुत ही कम लोग चाड या नाइजर जाकर इस फेस्टिवल को देख पाते हैं।