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भारत की इस जगह से दिखता है पूरा पाकिस्तान, हजारों की संख्या में पहुंचते हैं लोग

Wed, 23 Jan 2019 03:05 PM IST
kapil kumar फीचर डेस्क, अमर उजाला
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भारत वो देश है जहां बहुत सारे राजाओं-महाराजाओं ने राज किया है। इनमें से बहुतों ने भारत को लूटा लेकिन अपनी छाप छोड़ने के और अपने सुरक्षित निवास के लिए सभी ने अपने अपने तरीके से किलों का निर्माण भी किया। जो अपने आप में आज बेहद खास है।
 
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भारत के धनी इतीहास में से एक ऐसे किले की विशेषता बताने जा रहे हैं जो पांच सौ साल पुराना है और इस किले से पूरा पड़ोसी देश पाकिस्तान दिखाई देता है।कहा जाता बंटवारे के दौरान इसपर कब्जा जमाने की कोशिश पाकिस्तान ने की थी मगर नाकाम रहा। राजस्थान में स्थित इस किले का नाम मेहरागढ़न है। 
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मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवीं शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली पहाड़ी पर 125 मीटर ऊंचाई पर निर्मित है। जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है। 500 साल पुराने इस किले से पूरा पाकिस्तान दिखता है।

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1965 में भारत-पाक के युद्ध में सबसे पहले मेहरानगढ़ के किले को निशाना बनाया गया था। जोधपुर शासक राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस किले की नींव डाली और महाराज जसवंत सिंह (1638-78) ने इसे पूरा किया। 
 
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इस किले के दीवारों की सीमा 10 किलोमीटर तक फैली है। इनकी ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। इसमें दुर्गम रास्तों वाले सात आरक्षित दुर्ग बने हुए थे। घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे, जालीदार खिड़कियां हैं। 
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राव जोधा को चामुंडा माता मे काफी श्रद्धा थी। चामुंडा माता जोधपुर के शासकों की कुलदेवी हैं। कहा जाता है कि, माता कि कृपा से ही युद्ध के दौरान किले को भारत बचा पाया था। राव जोधा ने 1460 में मेहरानगढ़ किले के पास चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की।
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चामुंडा मां मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी हैं और आज भी लाखों लोग इनको पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता माता के आशीर्वाद से ही सन 1965 में पाकिस्तान के हमले के दौरान किले को कोई छू तक नहीं पाया था। 
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