दो नेत्रहीन बच्चों का सहारा बनी 70 साल की मां
- फोटो : @storiesbyaradhana
दो नेत्रहीन बच्चों के लिए मां का संघर्ष: उम्र बढ़ने के साथ इंसान को आराम और सहारे की जरूरत होती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में परिवार और जीवन की जिम्मेदारियां इतनी बढ़ जाती हैं कि व्यक्ति को बुढ़ापे में भी मेहनत और संघर्ष करते रहना पड़ता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कोलकाता से एक 70 वर्षीय महिला का ऐसा ही वीडियो सामने आया है। जिसमें उनके चेहरे की मुस्कान देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वह जिंदगी के किस कठिन दौर से गुजर रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर जहां इंसान आराम की उम्मीद करता है, वहीं उनके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आज भी कायम है।
वीडियो की शुरुआत में एक बुजुर्ग महिला घर के बाहर सीढ़ियों पर बैठी नजर आती हैं। कैमरा जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, उनके दोनों बच्चे भी दिखाई देते हैं। उन्हें देखते ही उनकी स्थिति का अंदाजा हो जाता है। महिला की बेटी करीब 50 साल की और बेटा 40 साल का है। दोनों जन्म से ही नेत्रहीन हैं।
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बच्चों की देखभाल और घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी महिला के कंधों पर है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वह तीन घरों में काम करती हैं और इसी से होने वाली कमाई से परिवार का गुजारा चलता है। करीब 19 साल पहले कैंसर की वजह से उनके पति का निधन हो गया था। इसके बाद बच्चों की पूरी जिम्मेदारी अकेले उन्हीं पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण दोनों बच्चों को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं मिल सकी। इसके बावजूद महिला ने हिम्मत नहीं छोड़ी और आज भी अपने बच्चों के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।
वीडियो को इंस्टाग्राम पर
शेयर किया गया है। जिसे अबतक कई हजारों लोग देख चुके हैं तो वहीं सैकड़ों लोगों ने इसे लाइक भी किया है। भावुक कर देने वाले इस वीडियो को देख यूजर्स की खूब सारी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में एक यूजर ने लिखा- जब महिला नहीं होंगी तब बच्चों का क्या होगा? वहीं कई यूजर्स महिला की मदद को आगे आए हैं और पैसे भेजने के लिए यूपीआई की मांग भी कर रहे हैं।
70 साल की उम्र में, जब आमतौर पर इंसान आराम और सुकून की जिंदगी चाहता है, तब भी इस महिला की परिस्थितियां उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए मजबूर कर रही हैं। उम्र बढ़ने के बावजूद उनके ऊपर अपने बच्चों की जिम्मेदारी है। लेकिन उनकी जिंदगी में असली खुशी और संतोष अपने बच्चों की मुस्कान से आता है। यही वजह है कि वह थकान और परेशानियों की परवाह किए बिना दिन-रात घरों में काम करती हैं, ताकि अपने बच्चों की जरूरतें पूरी कर सकें। उनके लिए बच्चों की खुशी ही सबसे बड़ा सुकून और उनकी मेहनत की सबसे बड़ी वजह है।
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