फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'ग्रेट बैरियर रीफ' को क्यों कहते हैं 'पानी का बगीचा'? जान लीजिए ये रहस्य

Sat, 13 Jun 2020 10:58 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
ग्रेट बैरियर रीफ - फोटो : Social media
किताबों में आपने प्रवाल भित्तियों या मूंगे की चट्टानों के बारे में तो बहुत पढ़ी होंगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी मूंगे की दीवार कहां है? आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में बनी 'ग्रेट बैरियर रीफ' दुनिया की सबसे बड़ी और विलक्षण मूंगे की चट्टानों के लिए मशहूर है। इस दीवार की लंबाई लगभग 1200 मील और चौड़ाई 10 मील से 90 मील तक है। हालांकि यह कई जगहों पर टूटी हुई है और इसका अधिकांश भाग जलमग्न है। यह यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित है। 
विज्ञापन

2 of 5
ग्रेट बैरियर रीफ - फोटो : Social media
दरअसल, प्रवाल भित्तियों को दुनिया के सागरीय जैव विविधता का उष्णस्थल (हॉटस्पॉट) माना जाता है। इन्हें समुद्रीय वर्षावन भी कहा जाता है। आमतौर पर प्रवाल कम गहराई पर ही पाए जाते हैं, क्योंकि अधिक गहराई पर सूर्य के प्रकाश और ऑक्सीजन की कमी होती है। 
विज्ञापन

3 of 5
ग्रेट बैरियर रीफ - फोटो : Social media
प्रवाल भित्तियां या मूंगे की चट्टानें समुद्र के भीतर स्थित प्रवाल जीवों द्वारा छोड़े गए कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के सर्वाधिक प्रवाल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पाए जाते हैं। भारत की अगर बात करें तो मन्नार की खाड़ी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार आदि द्वीप भी प्रवालों से ही निर्मित हैं। 

4 of 5
ग्रेट बैरियर रीफ - फोटो : Social media
दुनिया की सबसे बड़ी और प्रमुख अवरोधक प्रवाल भित्ति 'ग्रेट बैरियर रीफ' को 'पानी का बगीचा' भी कहते हैं, क्योंकि यह देखने में इतना खूबसूरत लगता है कोई भी इसे देखकर हैरान रह जाता है। दुनियाभर से लोग ग्रेट बैरियर रीफ को देखने के लिए आते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया को हर साल इससे करीब 42 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ग्रेट बैरियर रीफ - फोटो : Social media
हालांकि जलवायु परिवर्तन की वजह से 'ग्रेट बैरियर रीफ' को काफी नुकसान पहुंच रहा है। माना जा रहा है कि 2050 तक रीफ पूरी तरह नष्ट हो जएगी। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई सरकार इसे बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें