सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो
वायरल इस वीडियो में दिखाया गया है कि हर्षद और मृदु की प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी। दोनों की पहली मुलाकात स्कूल में हुई थी। तब न मोबाइल थे, न इंटरनेट, उनकी बातों का इकलौता जरिया थीं प्रेम भरी चिट्ठियां। हालांकि, समाज ने उनके प्यार को आसानी से अपनाने से इनकार कर दिया। हर्षद जैन समुदाय से थे और मृदु ब्राह्मण परिवार से। जैसे ही मृदु ने अपने घरवालों से शादी की बात की, परिवार ने साफ इंकार कर दिया, लेकिन प्यार जब सच्चा हो, तो वह हर दीवार गिरा सकता है।
सामाजिक बाधाओं को लांघकर की शादी
मृदु किसी भी हाल ही में अपने प्यार को पाना चाहती थी। वह हर्षद को पाने के लिए सारी बाधाओं को लांघने के लिए तैयार थीं। इसके लिए उन्होंने अपनी एक दोस्त के पास चिट्ठी छोड़ी, जिसमें लिखा था, "मैं वापस नहीं आ रही हूं।" इसके बाद, दोनों ने समाज की परवाह किए बिना भागकर शादी कर ली और एक नए जीवन की शुरुआत की।
10 रुपये की साड़ी से लेकर भव्य शादी तक का सफर
साल 1961 में जब हर्षद और मृदु ने शादी की, तब वह बेहद नॉर्मल थी। न कोई बड़ी बारात, न शाही भोज, ना भारी-भरकम गहने। मृदु की साड़ी महज 10 रुपये की थी। अब 64 साल बाद, उनके बच्चों और नाती-पोतों ने उनकी वह अधूरी ख्वाहिश पूरी करने का बीड़ा उठाया। पूरे परिवार ने मिलकर उनके लिए भव्य शादी का आयोजन किया।
सोशल मीडिया पर मिली ढेर सारी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर हर्षद और मृदु का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और खूब शेयर भी किया जा रहा है और इसे ढेर सारी प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं। एक यूजर ने लिखा, 'वाह, सच में प्यार हो तो ऐसा, नहीं तो प्यार करने का कोई फायदा नहीं।' दूसरे यूजर ने लिखा, 'पहले के लोग प्यार पाने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाते थे।' अब तो यह बस तमाशा बना हुआ है। एक और यूजर ने लिखा, 'आप दोनों को देखकर सच में काफी खुशी हो रही है।'