सोशल मीडिया पर फॉटोशॉप्ड तस्वीरें, सही-गलत फोटो कैप्शन, एडिटेड वीडियो जैसे फर्जी जानकारी तेजी से वायरल हो रही है। राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता और उनके आईटी सेल अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कई तरह की भ्रामक जानकारी दे रहे हैं, इसलिए इस मामले में पाठकों की सजगता बहुत आवश्यक है।
आपको बता दें कि, राहुल गांधी की वायरल तस्वीर 8 दिसंबर 2015 की है, खुद कांग्रेस ने ये तस्वीर अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल के जरिए शेयर की थी। उस समय राहुल गांधी तमिलनाडु और पुडुचेरी में बाढ़ प्रभावित लोगों से मिलने गए थे उसी तस्वीर को फोटोशॉप्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
आपको बता दें कि, महिला के पीछे एक अन्य हाथ दिख रहा है, जिसके आधार पर विरोधी पार्टियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह इमेज फोटोशॉप्ड है। अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रही बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने इसी तस्वीर को लेकर उन पर हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जब इश्तेहार में ही sleight of hand (हाथ की सफाई) नजर आए तो विचार करें कांग्रेस की भ्रष्ट मानसिकता की जड़ें कितनी गहरी हैं।'
सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर पर न जाएं, ऐसा कतई नहीं है। यह फोटो गलत तरह से कटआउट क्रॉप की गई है और जो हाथ दिख रहा है, वह कांग्रेस के ही एक अन्य कार्यकर्ता का है। यह क्रॉपिंग की गलती है, जबकि फोटो सही है। यह फोटो वर्ष 2015 की है। उस समय राहुल गांधी तमिलनाडु और पुडुचेरी में बाढ़ प्रभावित लोगों से मिलने गए थे। उसी समय की तस्वीर के जरिए राहुल गांधी अपनी 'न्याय' योजना की बात कर रहे हैं।
कोई भी पेशेवर संस्था ये जरूर बताती है कि उसकी जानकारी का सोर्स क्या है। बिना सोर्स बताए जानकारी देने वालों से सावधान रहें। वेबसाइट का यूआरएल भी देखें। आपको लग सकता है कि आप अमर उजाला की साइट देख रहे हैं, लेकिन 'डॉट कॉम,' के अंत में 'डॉट को' या 'डॉट इन' का मामूली-सा बदलाव साइट के पेज को पूरी तरह बदल देता है।
तारीख जरूर करें चेक
कोई चीज एक बार वर्ल्ड वाइड वेब में आ जाए, तो फिर ये हमेशा वहां रहती है। ये बात समाचारों के लिए भी लागू होती है। शुक्र मनाइए कि सभी विश्वसनीय समाचारों में सोर्स के साथ उनके पब्लिश होने की तारीख भी दी जाती है। कोई भी चीज शेयर करने से पहले इसे जरूर जांचें। पुराने लेख, खासकर आतंकवाद से लड़ाई या आर्थिक विकास जैसी लगातार बदलने वाली खबर की कुछ समय बाद कोई प्रासंगिकता नहीं रह जाती है।
फैक्ट चेक करना ज्यादा मुश्किल नहीं है
आप लेखक का नाम या जानकारी देने वाली साइट को भी सर्च कर सकते हैं, ताकि पता चल सके कि उसने और क्या-क्या किया है। जब आप कुछ भी ऑनलाइन पढ़ते हैं तो देखें कि इसे किसने पब्लिश किया है। क्या वो इस्टैबलिश्ड न्यूज पब्लिशर हैं और क्या उनका नाम चर्चित है जिस पर भरोसा किया जा सके।