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Female Spies: दुनिया की पांच खतरनाक जासूस महिलाएं, जिनके बारे में जानकर उड़ जाएंगे होश

Tue, 05 Aug 2025 07:57 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Female Spies: दुनिया में आपने कई पुरुष जासूसों की कहानियां पढ़ी और सुनी होंगी। लेकिन जासूसी कहानियों में किसी महिला का खूनी होना हमेशा लोगों को आकर्षित करता है।
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दुनिया की पांच खतरनाक जासूस महिलाएं - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Female Spies: दुनिया में आपने कई पुरुष जासूसों की कहानियां पढ़ी और सुनी होंगी। लेकिन जासूसी कहानियों में किसी महिला का खूनी होना हमेशा लोगों को आकर्षित करता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि महिलाओं ऐसे किरदार में कम देखा जाना और जो सामान्य नहीं होता वो हमेशा आकर्षित करता है। यह तो काल्पनिक कहानियों की बात, लेकिन ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी है जो अपनी असल जिंदगी में एक खतरनाक जासूस रहीं और उनका जीवन हैरान करने वाला रहा। आज हम आपको कुछ ऐसी ही जासूस महिलाओं के बारे में बताएंगे। 

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माता हारी

गेरत्रुद मार्गरेट जेले, जिसे माता हारी के नाम से जाना जाता है। माता हारी एक नृत्यांगना थी, जिसे प्रथम विश्व युद्ध में जासूसी करने के आरोप में गोली मार दी गई। माता हारी की जिंदगी पर साल 1931 में हॉलीवुड फिल्म बनी जिसमें ग्रेटा गर्बो मुख्य भूमिका में थीं। गेरत्रुद मार्गरेट का जन्म हॉलैंड में हुआ था और शादी एक फौजी कैप्टन से। एक बुरे रिश्ते में फंसी गेरत्रुद मार्गरेट ने अपने नवजात बच्चे को भी खो दिया।

साल 1905 गेरत्रुद मार्गरेट ने खुद को 'माता हारी' की पहचान दी और इटली के मिलान स्थित ला स्काला और पेरिस के ओपेरा में एक नृत्यांगना बनकर उभरी। अब गेरत्रुद मार्गरेट खो चुकी थी और दुनिया में जो थी उसे लोग माता हारी के नाम से जानते थे। अपने पेशे के कारण उसके लिए सफर करना आसान था। इस कारण जर्मनी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान माता हारी को पैसे के बदले जानकारियां साझा करने का प्रस्ताव दिया और इस तरह वह जर्मनी की जासूस बनी।
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माता हारी ने खुद तो किसी को नहीं मारा, लेकिन उनकी जासूसी ने लगभग 50 हजार फ्रांसिसी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। इसके बाद फ्रांस को उस पर शक होने लगा। फरवरी 1917 में उसे पेरिस से गिरफ्तार कर लिया गया और अक्तूबर में उन्हें गोली मार दी गई। माता हारी को हिटलर के लिए जासूसी करने के आरोप में मार दिया गया था। 

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शॉर्लेट कॉर्डी

शॉर्लेट का पूरा नाम मैरी एन शार्लेट डी कॉर्डी था और वह फ्रांस की क्रांति का हिस्सा रहीं। शॉर्लेट एक गिरोडिन थीं। फ्रांस की क्रांति में गिरोडिन वो हुए जो राजशाही तो खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हिंसा के खिलाफ थे। लेकिन क्रांति के लिए हिंसा को न अपनाने वाली शॉर्लेट ने अपने विपक्षी जैकोबिन समूह के नेता जीन पॉल मैराट की हत्या की।

जुलाई साल 1793 शार्लेट ने मैराट को उस वक्त चाकू मारा, जब वो बाथटब में नहा रहे थे। जब उन्हें इस हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया तो शॉर्लेट ने इसे देश हित में की गई हत्या कहा। उन्होंने दावा किया कि इस एक हत्या से उन्होंने सैकड़ों-हजारों की जान बचाई है। लेकिन इसके चार दिन बाद ही उन्हें सजा मिली।

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शी जिआनकिआओ

जासूस अपना उपनाम रखना पसंद करते हैं और इसी तथ्य को यथार्थ में बदलते हुए शी गुलान ने जासूसी की दुनिया में खुद का नाम शी जिआनकिआओ रखा। जिआनकिआओ अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए जासूस बनीं। 10 साल बाद जिआनकिआओ ने चुआंगफांग के सिर में तब गोली मारी जब वह एक बौद्ध मंदिर में पूजा कर रहे थे। 

इस हत्या को अंजाम देने के बाद घटनास्थल से भागने के बजाय वह वहीं रुकी रही और अपना गुनाह कबूल किया। इस हाई प्रोफाइल केस में 1936 में फैसला आया और जिआनकिआओ को बरी कर दिया गया। इस केस में कोर्ट का कहना था कि ये हत्या अपने पिता की हत्या से आहत होकर की गई है। साल 1979 में शी जिआनकिआओ की मौत हुई।

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ब्रिगित मोअनहॉप्ट

एक वक्त में जर्मनी की सबसे खूंखार महिला मानी जाने वाली ब्रिगित मोअनहॉप्ट रेड आर्मी फैक्शन की सदस्य रहीं। ब्रिगित 1977 में जर्मनी में एक आतंकी गतिविधि में शामिल रहीं। 70 के दशक में पश्चिम जर्मनी में एक वाम चरमपंथी समूह द्वारा एक के बाद एक कई हाईजैक, हत्याएं और बम धमाके किए गए। जहाज हाईजैक के साथ लगभग 30 लोगों की हत्या इस समूह ने की। ये अपराध पश्चिम जर्मनी में पूंजीवाद को खत्म करने के नाम पर किए गए।

1982 में इस अपराध में शामिल होने के कारण मोअनहॉप्ट को गिरफ्तार किया गया और पांच साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा उन्हें नौ अन्य हत्याओं के मामले में 15 साल की सजा दी गई। मोअनहॉप्ट ने कभी अपना जुर्म कबूल नहीं किया और 2007 में उन्हें परोल पर जेल से बाहर आने का मौका मिला।

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एजेंट पेनेलोप

इस्राइल की इंटेलीजेंस एजेंसी मोसाद के लिए काम करने वाली एजेंट पेनेलोपे फलस्तीनी समूह ब्लैक सितंबर के नेता अली हुसैन सलामे की हत्या में शामिल रहीं। अली हुसैन ने साल 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक के दौरान 11 इस्राइली खिलाड़ियों को बंधक बनाया और उनकी हत्या कर दी गई। इस हत्या के जवाब में इस्राइली प्रधानमंत्री गोल्डे मेरी के आदेश पर 'ऑपरेशन व्रैथ ऑफ गॉड' शुरू किया गया और इस ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अली हुसैन सलामे की हत्या की गई।

अली हुसैन को मारने के लिए पेनेलोपे ने लगभग छह हफ्ते का वक़्त उस अपार्टमेंट के पास बिताया जहां वह रहा रहते थे। जिस बम धमाके में अली हुसैन सलामे की हत्या हुई उसमें पेनेलोपे भी मारी गईं। मौत के बाद उनके सामान से एक ब्रितानी पासपोर्ट बरामद हुआ जिसमें एरिका चैंबर नाम लिखा था।

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