शिवाजी महाराज का पालन-पोषण
शिवाजी महाराज का उनकी मां जीजाबाई के संरक्षण में पालन-पोषण हुआ था। जीजाबाई बहुत धार्मिक थीं। उनके धार्मिक दृष्टिकोण और कड़ी शिक्षा का शिवाजी पर पर गहरा प्रभाव पड़ा। शिवाजी महाराज बचपन से ही राजनीति, युद्ध की रणनीतियां और धर्म की शिक्षा लेकर बड़े हुए। महाभारत, रामायण की कथाओं और संतों के सत्संगों के बीच उनका जीवन बीता।
शिवाजी का परिवार
मराठा साम्राज्य के महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की आठ पत्नियां थीं। 1640 में उनकी पहली शादी सईबाई निंबालकर से हुई थी। इनकी ही संतान संभाजी महाराज थे। उनकी दूसरी पत्नी का नाम सोयराबाई मोहिते था, तीसरी पत्नी का नाम राणीसाहेब पुतला बाई भोसले, चौथी पत्नी सकवरबाई, पांचवीं पत्नी राजकुंवर बाई, छठवीं पत्नी काशीबाई, सातवीं पत्नी लक्ष्मीबाई और आठवीं पत्नी गुंवांताबाई थीं। शिवाजी महाराज की चार संताने थीं और सबसे बड़े बेटे संभाजी महाराज उनके उत्तराधिकारी बने थे।
कौन थे छत्रपति संभाजी महाराज?
संभाजी महाराज छत्रपति शिवाजी महाराज के बड़े पुत्र थे। उनका जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर के किले में हुआ था। सिर्फ दो साल की उम्र में ही संभाजी की मां सईबाई का निधन हो गया था। इसके बाद राजमाता जीजाबाई ने सांभाजी की देखभाल की थी। शिवाजी महाराज संभाजी से बहुत प्यार करते थे। जब आगरा अभियान पर शिवाजी गए, तो वो अपने साथ सांभाजी को भी ले गए। उस समय संभाजी की उम्र सिर्फ नौ साल थी। संभाजी ने उस दौरान मुगल शासक औरंगजेब को देखा था। उनको बचपन से ही शत्रुओं की कूटनीति और क्रूरता की जानकारी थी। संभाजी की शादी जिवुबाई से हुई थी। शादी के बाद जिवुबाई ने अपना नाम येसुबाई रख लिया। दोनों की एक बेटी भवानी बाई और फिर एक बेटा जिसका नाम शाहू प्रथम था। शाहू प्रथम मराठा साम्राज्य के छत्रपति बने।
साल 1680 में शिवाजी महाराज का निधन हो गया। इसके बाद संभाजी महाराज मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति बने। उन्होंने करीब 1681 से 1689 तक करीब नौ सालों तक शासन किया। उन्होंने अपनी वीरता और देशभक्ति से एक पहचान हासिल की। बताया जाता है कि सांभाजी महाराज ने कम उम्र में ही 120 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की। भारत में उस समय संभाजी महाराज जैसा कोई योद्धा नहीं था। छत्रपति संभाजी महाराज ने बहुत कम समय में अपने पराक्रम के बल पर मराठा साम्राज्य का विस्तार और बचाव किया। उन्होंने अकेले ही मुगल साम्राज्य का मुकाबला किया।
मुगलों के आगे नहीं झूके संभाजी महाराज
1689 में संभाजी महाराज को मुगलों ने धोखे से पकड़ लिया। इसके बाद औरंगजेब ने संभाजी महाराज को जिंदा रहने के लिए इस्लाम कबूल करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद मुगलों ने संभाजी महाराज को काफी शारीरिक यातनाएं दीं। यहां तक कि उनकी चमड़ी उधेड़ दी गई। उनके हाथ काट दिए दिए, लेकिन सांभाजी महाराज छूके नहीं। औरंगजेब ने 11 मार्च 1689 को छत्रपति संभाजी महाराज को फांसी पर चढ़वा दिया। छत्रपति संभाजी महाराज ने हिंदू धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों को त्याग दिया। उनकी वीरता, कर्तव्य और देशभक्ति के लिए आज भी उनको याद किया जाता है। संभाजी महाराज को छावा भी कहा जाता है।
क्या होता है छावा का मतलब
विक्की कौशल की फिल्म छावा इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है। यह फिल्म सांभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। लेकिन क्या आपको छावा का मतलब पता है? तो आपको बता दें कि छावा का मतलब शेर का बच्चा होता है।