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Earth: वैज्ञानिकों ने खोजी धरती जैसी दुनिया, पृथ्वी के है बेहद करीब, नासा ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Sat, 22 Aug 2026 07:54 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Earth: वैज्ञानिकों को धरती के बाहर जीवन की तलाश में बड़ी सफलता मिली है। खगोलविदों ने हमारे सौर मंडल से सिर्फ 25 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह की खोज की है, जिस पर तरल पानी मौजूद हो सकता है। 
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वैज्ञानिकों ने खोजी धरती जैसी दुनिया, पृथ्वी के है बेहद करीब - फोटो : AI
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विस्तार
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Earth: खगोलविदों ने हमारे सौर मंडल से सिर्फ 25 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसे ग्रह की खोज की है, जहां पर तरल पानी मौजूद हो सकता है। सबसे खास बात यह है कि इस ग्रह पर तापमान जीवन के लिए अनुकूल हो सकता है। खगोलविदों की नई खोज से एक नई उम्मीद जगी है। वैज्ञानिकों ने इसे GJ 3378b नाम दिया है। यह अपने तारे के हैबिटेबल जोन यानी रहने योग्य इलाके में चक्कर लगा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि  GJ 3378b खोजा गया अनोखा ग्रह शायद चट्टानी है और अपने तारे के हैबिटेबल जोन रहने लायक इलाके में घूमता है, जिसका ऐसा हो सकता है कि इसकी सतह पर तरल पानी मौजूद हो। हालांकि, अभी यह कहना है जल्दबाजी होगी कि ग्रह पर जीवन मौजूद है, लेकिन वैज्ञानिकों को भविष्य में जीवन की तलाश का एक बेहद दिलचस्प ठिकाना जरूर मिल गया है।

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कैसे वैज्ञानिकों ने खोजा नया ग्रह GJ 3378b?

वैज्ञानिकों को यह खोज द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपी है। इससे पता चलता है कि सूरज के पास रहने लायक ग्रह पहले सोचे गए अनुमान से कहीं अधिक आम हो सकते हैं। लेकिन 25 प्रकाश वर्ष दूर लग सकता है, लेकिन खगोलविदों का मानना है कि GJ 3378b धरती के सबसे पास रहने लायक पड़ोसियों में से एक है। इस शोध के प्रमुख यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया इरविन में एस्ट्रोनॉमी के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल रॉबर्टसन है। उन्होंने बताया कि यह नया ग्रह पृथ्वी के सबसे पास के कॉस्मिक पड़ोसियों में से एक है। 

25 प्रकाश वर्ष सुनने में काफी लंबा रास्ता है, लेकिन आशाकगंगा 100,000 प्रकाश वर्ष चौड़ा है। इसलिए इस हिसाब से यह ग्रह पृथ्वी का पड़ोसी है। लेकिन इसे बड़े बैकयार्ड टेलिस्कोप से भी नहीं देखा जा सकता है। GJ 3378b और इसका होस्ट रेड ड्वार्फ स्टार कैमेलोपार्डालिस के उत्तरी तारामंडल में स्थित है। रेड ड्वार्फ स्टारब्रह्मांड में मिलने वाले सबसे छोटे, ठंडे और सबसे अधिक संख्या में मौजूद तारे हैं। 
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तुलनात्मक तौर पर ठंडे रेड ड्वार्फ स्टार सभी स्टार्स का 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, जो उन्हें हमारे सौर मंडल के बाहर जीवन की खोज में तुरंत एक जरूरी लक्ष्य बनाता है। GJ 3378 जैसे रेड ड्वार्फ काफी छोटे और धुंधले होते हैं। इससे ऑर्बिट में चक्कर लगा रहे ग्रहों का पता लगाना मुश्किल होता है। वैज्ञानिकों ने रेडियल वेलोसिटी मेथड का इस्तेमाल किया। इसमें टेलिस्कोप होस्ट स्टार में एक हल्का सा वॉबल डिटेक्ट किया जाता है, जिससे ऑर्बिट में किसी ग्रह का ग्रेविटेशनल पुल नजर आता है। वैज्ञानिक वॉबल का इस्तेमाल ग्रह के मास और ऑर्बिट को कैलकुलेट करने के लिए कर सकते हैं।

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प्रोफेसर पॉल रॉबर्टसन का कहना है कि पानी के पीछे चलो, यह हमारा मंत्र है। पानी ऐसी चीज है, जिसकी पृथ्वी पर हर जानी-पहचानी जीवित चीज की आवश्यकता होती है। इसलिए जब हम ऐसे कोशिश करते हैं ऐसे माहौल को खोजा जाए, जो जीवन को बनाकर रख सके, तो हम सबसे पहले इसी चीज को देखते हैं। अगर GJ 3378b में सही एटमॉस्फियरिक कंडीशन मिलती है, यह भविष्य में जीवन का पता लगाने वाले अध्ययन के लिए एक मजबूत दावेदार बन सकता है।

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