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खूबसूरती के लिए हद पार कर दी थी यहां की महिलाओं ने, अपने पैरों को तोड़कर देती थीं ऐसा आकार

Tue, 05 Feb 2019 12:29 PM IST
Shani Mishra फीचर डेस्क, अमर उजाला
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कहा जाता है की फैशन और खूबसूरत दिखने के कुछ तरीके अजीब और खतरनाक होते हैं। फैशन के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार होते हैं। हालांकि, अगर हम 10 वीं सदी के फैशन के तरीकों पर नजर डालें, तो ये सच है कि उस समय की महिलाओं ने फैशन के खतरनाक ट्रेंड को अपनाया था। इस खबर को विस्तार से पढ़ने के बाद आपको विश्वास हो जाएगा की उस समय में महिलाएं इस फैशन को अपनाने के लिए अपनी जान से खेल जाती थीं। 
 
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फुट बाइंडिंग चीन में एक फैशन की प्रथा थी जो 1,000 वर्षों पहले चलती थी। 10 वीं से 20 वीं शताब्दी तक, इसे इतिहास की सबसे खतरनाक फैशन प्रवृत्तियों में से एक माना जाता है। सदियों से, छोटे, घुमावदार पैर चीनी संस्कृति में सुंदरता का प्रतीक थे, और पैर-बंधन की विचित्र परंपरा को मां से बेटी, पीढ़ी दर पीढ़ी में अपनाया गया था। जिससे कई चिकित्सा समस्याएं पैदा हुईं और कुछ मामलों में महिलाओं की मृत्यु भी हुई।
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माना जाता है कि फुट-बाइंडिंग की प्रथा सम्राट ली यू के शासनकाल में 970 ई के दौरान शुरू हुई । कथित तौर पर, सम्राट के पसंदीदा पत्नी, याओ-नियांग ने अपने पैरों को चंद्रमा के आकार में बांधा और सम्राट के सामने कमल पर अपने पैरों के अंगूठों के बल पर नृत्य किया। अन्य उपपत्नीयां भी सम्राट को प्रभावित करना चाहती थीं और फिर सभी ने याओ-नियांग की नकल करना शुरू कर दिया।

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ये जल्द ही फैशन ट्रेंड बन गया और दक्षिण चीन में उच्च वर्ग की महिलाओं द्वारा अपनाया गया और धीरे-धीरे पुरे देश में  फैल गया। जबकि शुरुआत में इसे उच्च सामाजिक स्थिति और धन का प्रतीक माना जाता था, और फिर यह सभी महिलाओं के लिए एक तरह से अनिवार्य हो गया।
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यह दर्दनाक प्रक्रिया आम तौर पर चार साल की उम्र से नौ साल में शुरू कर दी जाती थी, और इस फैशन को प्राप्त करने का केवल एक ही तरीका था, पैरों की हड्डियों को तोड़कर उन्हें आकार देना। अलग-अलग क्षेत्रों में पैरों को आकर देने की विधि भिन्न थी। शहरी क्षेत्रों की महिलाओं में यह सबसे आम था क्योंकि किसान समुदायों की महिलाओं इस फैशन को कम अपनाती थीं क्योंकि उन्हें खेतों में काम करने की आवश्यकता होती थी।
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दर्दनाक प्रक्रिया के कारण कई जटिलताएं थीं, जिससे संक्रमण, गैंग्रीन और कई मामलों में आजीवन विकलांगता भी हो जाती थी, जो आखिर में मृत्यु का कारण भी बनीं। हालांकि चीन में फुट बाइंडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 1911 में कई महिलाओं और लड़कियों ने फिर भी अपने पैरों में बाइंडिंग कराई थी। 1950 के दशक में, एंटी-फुट-बाइंडिंग इंस्पेक्टर अक्सर लोगों के घरों में महिलाओं के पैरों पर जबरन बाइंडिंग हटाने के लिए आते थे। 
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कई महिलाओं को बाद में परंपरा अपनाने का पछतावा भी हुआ। चीन की एक बूढ़ी महिला झोउ गुइजेन, जो चीन में इस फैशन को अपनाने वाली आखिरी महिलाओं थी, ने एक साक्षात्कार में कहा था, "मैं नृत्य नहीं कर सकती, मैं ठीक से नहीं चल सकती। मुझे इसका बहुत पछतावा है। लेकिन उस समय, यदि पैर नहीं तोड़ती, तो कोई भी मुझसे शादी नहीं करता। "
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